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खूब था LNG का भंडार, मगर सरकार की एक गलती ने पाकिस्तान में खड़ा किया गैस संकट

पाकिस्तान में गैस संकट का असर बिजली उत्पादन पर पड़ने लगा है। आशंका है कि गर्मी बढ़ने के साथ-साथ जनता को अधिक कटौती का भी सामना करना पड़ेगा।

Pakistan Gas Crisis

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

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ईरान युद्ध ने पाकिस्तान को गहरे गैस संकट में धकेल दिया है। अपनी जरूरत का 60 फीसद एलपीजी पाकिस्तान ईरान से खरीदता है। युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा आई है। पाकिस्तान अपनी अधिकांश एलएनजी जरूरत की पूर्ति घरेलू स्तर पर करता था। मगर मांग ज्यादा होने पर 2015 में उसने एलएनजी का आयात करना शुरू किया। आज पाकिस्तान की आयतित एलएनजी का 99 फीसद हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात और कतर से आता है। 

 

पाकिस्तान ने कतर के साथ दो समझौते किए हैं। एक समझौता 10 साल और दूसरा 15 साल का है। इसके तहत हर महीने नौ शिपमेंट पाकिस्तान को भेजी जानी है। महंगी बिजली और बार-बार कटौती के कारण पाकिस्तान की जनता ने अपनी छतों पर सोलर लगवाना शुरू किया। अब रोजाना पाकिस्तान में 9,000 से 10,000 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनती है।

 

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सोलर की वजह से 2022 से 2025 तक बिजली की कुल मांग में 11 फीसद की कमी आई। सरकार को दिन के समय अपने बिजली संयत्रों को बंद करना पड़ा, क्योंकि पाकिस्तान अपनी जरूरत की 21 फीसद से अधिक बिजली का उत्पादन एलएनजी से करता है। मगर बिजली की घटती मांग के कारण 2025 में एलएनजी की खपत में 1.21 मिलियन टन की कमी देखने को मिली। 

 

पाकिस्तान की सरकार कतर और यूएई के साथ डील करके फंस गई। घरेलू स्तर पर मांग घटने के बावजूद उसे डील के मुताबिक एलएनजी की तय खेप खरीदनी ही पड़ी। अधिक गैस के कारण पाकिस्तान ने घरेलू स्तर भी उत्पादन नहीं बढ़ाया। वहीं अतिरिक्त गैस को घाटे के बावजूद घरेलू पाइपलाइनों में सप्लाई करनी पड़ी।

 

2 मार्च को ईरान ने कतर के रास लाफान स्थित गैस सुविधाओं पर अटैक किया। यह दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात परिसर है। हमले के बाद कतर ने एलएनजी उत्पादन बंद करने का ऐलान किया। इसका असर यह हुआ कि 2 मार्च से पाकिस्तान को कतर से गैस की कोई आपूर्ति नहीं हो पा रही है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 तक पाकिस्तान को हर महीने 8 से 12 एलएनजी शिपमेंट मिली, लेकिन युद्ध के बाद यह संख्या घटकर सिर्फ 2 पर सिमट गई।

 

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अब अचानक एलएनजी की आपूर्ति बंद होने से पाकिस्तान के सामने बिजली संयंत्र चलाने का संकट है। अगर उसके पास रणनीतिक भंडार होते तो इसका इस्तेमाल संकट के समय कर सकता था। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि युद्ध थमने के महीनों बाद तक एलएनजी की आपूर्ति बहाल नहीं होगी। सरकार के पास अब बिजली की कटौती के अलावा विकल्प नहीं है। 

 

रोचक बाद यह है कि जनवरी महीने तक पाकिस्तान के पास अपनी जरूरत से अधिक एलएनजी थी। वहां की सरकार ने चुपचाप तरीके जरूरत से ज्यादा गैस को दूसरे देशों को बेच दिया। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दुनियाभर में गैस संकट खड़ा हुआ तो पाकिस्तान भी उससे अछूता नहीं रहा। 

 

18 मार्च को इजरायल ने ईरान के दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर अटैक किया। हमले के बाद ईरान ने इराक समेत अन्य देशों को गैस आपूर्ति रोक दी। पाकिस्तान अपनी जरूरत का 60 फीसद एलपीजी ईरान से ही खरीदता है। ईरान पर हमले का असर यह हुआ कि पाकिस्तान की एलपीजी आपूर्ति पर भी विपरीत असर पड़ा। 


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