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इजरायल ने लेबनान पर दागे सफेद फॉस्फोरस के गोले? समझिए कितना खतरनाक है

इजरायल और ईरान के बीच लगातार टकराव जारी है। इजरायल कई अन्य देशों में ईरान समर्थकों को निशाना बना रहा है। अब दावा किया गया है कि इजरायल ने लेबनान में सफेद फॉस्फोरस के गोले दागे हैं।

Israel fired white phosphorus in Lebanon

ईरान के तेहरान की फाइल फोटो, Photo Credit: PTI

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल बनाम ईरान का युद्ध कई देशों तक फैला हुआ है। इजरायल उन संगठनों को भी निशाना बना रहा है जो ईरान का साथ देते आ रहए हैं। इसी क्रम में आई एक खबर ने दुनियाभर के ह्यूमन राइट्स संगठनों को चौंका दिया है। यह खबर इजरायल और लेबनान से जुड़ी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल ने लेबनान में सफेद फॉस्फोरस के गोले दागे हैं।

 

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (HRW) ने आरोप लगाया है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस से भरे गोले दागे। HRW कहना है कि रिहायशी इलाकों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। इस आरोप ने एक बार फिर इस खतरनाक केमिकल हथियार को लेकर बहस छेड़ दी है।

 

HRW की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान सात तस्वीरों को सत्यापित किया गया है। इन तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इजरायली तोपखाने ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों की ओर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हमला उस चेतावनी के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के लोगों से इलाका खाली करने को कहा था।

 

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रिपोर्ट में क्या है?

HRW ने यह भी कहा है कि वह स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं कर पाया कि हमले के समय गांव में नागरिक मौजूद थे या नहीं। साथ ही किसी के घायल होने या हताहत होने की भी पक्की जानकारी सामने नहीं आई है। संगठन के लेबनान शोधकर्ता ने कहा कि रिहायशी इलाकों में इस तरह के हथियार का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है और इससे आम लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

क्या होता है व्हाइट फॉस्फोरस?

व्हाइट फॉस्फोरस एक अत्यधिक ज्वलनशील रासायनिक पदार्थ है, जिसे तोप के गोले, बम या रॉकेट के जरिए छोड़ा जाता है। यह हवा में ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जल उठता है और बेहद ऊंचे तापमान पर जलता रहता है। इसके कारण घर, खेत और अन्य ढांचे आसानी से आग की चपेट में आ सकते हैं।

 

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विशेषज्ञों के अनुसार, यह पदार्थ मानव शरीर के सेल्स तक को जला सकता है और ऑक्सीजन मिलने पर बार-बार सुलगने लगता है, जिससे इसकी चोटें और भी खतरनाक हो जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के मुताबिक, घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल बेहद जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि युद्ध के दौरान सेनाओं को नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

इजरायल का क्या है पक्ष?

इस मामले में इजरायल की सेना ने अभी कोई नया बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, पहले वह यह कह चुकी है कि व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल आम तौर पर धुएं की आड़ बनाने या सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जाता है। सेना का दावा रहा है कि इसका उपयोग सीधे नागरिकों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाता।इससे पहले, एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने आरोप लगाया था कि इजरायल ने हिज्बुल्लाह के साथ पिछली लड़ाई के दौरान ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया था।


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