सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी कंपनी आरामको ने अपने रास तनूरा रिफाइनरी प्लांट को बंद कर दिया है। ईरान की तरफ से ड्रोन हमले में इस प्लांट में भीषण धमाका हुआ है। रिफाइनरी प्लांट को नुकसान पहुंचा है। रिफाइनरी बंद होने के बाद अब कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति हो गई हैं। यह सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनियों में से एक है।
सऊदी अरमाको हर दिन, 550,000 बैरल कच्चा तेल हर दिन उत्पादित करता है। यह प्लांट, फारस की खाड़ी के पास है, जहां ईरान ने हमला किया था। हमले के बाद रिफाइनरी के एक बड़े हिस्से में आग लग गई, जिस पर काबू पा लिया गया है। आरामको के मीडिया विभाग ने इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
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असर क्या हुआ?
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। इजरायल, ईरान और अमेरिका की जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, UAE,बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे देशों में मिसाइल अटैक किया है, जिसके बाद तनाव चरम पर है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। ईरान जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
ईरान के हमले में कितना नुकसान?
कच्चे तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रहीं हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से दुनियाभर में तेल सप्लाई ठप पड़ सकती है। यहां से होने वाले तेल की सप्लाई अगर बाधित हुई तो तेल संकट पैदा हो सकता है। बड़ी मात्रा में तेल यहां से गुजरता है।
ईरान के हमलों में 3 तेल टैंक पानी में डूब गए हैं। सऊदी अरामको और अबू धाबी नेशनल ऑल की पाइपलाइन अभी तक काम कर रही है, उसे नुकसान नहीं पहुंचा है। तेल की कीमतें बढ़ सकती है। नेचुरल गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूरोपीय देशों में अब गैस की कीमतें 22 फीसदी तक बढ़ गई हैं।
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कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
CME ग्रुप के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल था, जो 8.6 फीसदी बढ़ गया है। शुक्रवार को इसकी कीमतें 67 डॉलर प्रति बैरल थीं। अब तेल और महंगा होने की आशंका जताई जा रही है।