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सारा खेल 31 फीसदी तेल के लिए? ट्रंप की असली हकीकत सामने आ गई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम ने एक इंटरव्यू में बताया कि अमेरिका ईरान और वेनेजुएनला के तेल में पार्टनर्शिप चाहता है। इसका सीधा मतलब है कि ईरान पर हमला तेल के लिए किया गया है।

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डोनाल्ड ट्रंप, Photo Credit: SORA

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग से मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर पहले ईरान पर हमला किया और उनके सुप्रीम लीडर समेत कई सीनियर अधिकारियों को मार दिया था। इसके बाद से ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इस युद्ध से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। इसका सीधा असर दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। अमेरिका के हमले की निंदा उनके ही देश में भी हो रही है लेकिन अब ट्रंप के एक करीबी का बयान सामने आया है जिसमें वह ईरान पर हमले का कारण तेल को बता रहे हैं।

 

ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम ईरान युद्ध को अमेरिका के लिए एक बढ़िया निवेश बता रहे हैं। उन्होंने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, 'वेनेजुएला और ईरान के पास दुनिया के तेल भंडार का 31 फीसदी हिस्सा है। इस 31 फीसदी हिस्से के साथ हमारा पार्टनरशिप होना चीन के लिए बुरे सपने के समान है। यह युद्ध एक अच्छा निवेश है।' उनके इस बयान का साफ और सीधा मतलब है कि अमेरिका की नजर ईरान के तेल पर है और तेल भंडारों पर कब्जे के लिए ही अमेरिका ने यह युद्ध शुरू किया है। 

 

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सैनिकों की तारीफ की

लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अगर वेनेजुएला और ईरान के तेल में अमेरिका की हिस्सेदारी होती है तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा, क्योंकि चीन इन दोनों देशों से तेल खरीदता है। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों की ईरान पर हमले के लिए तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि हमें अमेरिकी सैनिकों के साथ खड़े होना चाहिए। अमेरिका अब वह सब कर रहा है जो मैंने कभी नहीं देखा। 

लोगों ने उठाए सवाल

अमेरिका ने आधिकारिक रूप से कभी नहीं कहा कि वह ईरान के तेल भंडारों पर कब्जा चाहता है। हालांकि, ट्रंप के करीबी सहयोगी के इस बयान से अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिर्फ तेल के लिए ही अमेरिका ने ईरान पर हमला किया। सोशल मीडिया पर भी अमेरिका के मकसद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर ग्राहम के बयान को शेयर करते हुए कई यूजर्स ने कहा है कि ट्रंप के करीबी ने ही उनके झूठ से पर्दा उठा दिया है। सोशल यूजर्स ने कहा है कि अमेरिकी नेता यह कहने में शरमा नहीं रहे हैं कि वह तेल पर कब्जा करना चाहते हैं।

 

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वेनेजुएला के बाद ईरान पर ट्रंप का हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कई देशों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने इससे पहले वेनेजुएला पर हमला किया था और वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया था। अमेरिका की इस कार्रवाई के पीछे भी तेल को ही मुख्य वजह माना जा रहा था। इसके बाद अब 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर हमला किया। ईरान और वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देश हैं और दुनिया का 31 प्रतिशत तेल इन्हीं दोनों देशों से ही आता है। 

 

ईरान भी यह दावा कर चुका है कि अमेरिका की नजर ईरान के तेल भंडारों पर नजर है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने आरोप लगाया कि वाशिंगटन की कार्रवाइयां ईरान के विशाल ऊर्जा भंडार पर अवैध नियंत्रण हासिल करने के उद्देश्य से की गई हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल का मकसद ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करना और देश को कमजोर करना है। 


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