अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 27 फरवरी को एक बड़ा सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' छेड़ दिया है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान के मिसाइल केंद्रों, नौसैनिक अड्डों और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना है। अमेरिका और इजरायल के इस साझा ऑपरेशन का मकसद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह से बर्बाद करना है।
हैरानी की बात यह है कि इस युद्ध के बीच अमेरिकी सरकार ने AI स्टार्टअप 'एंथ्रोपिक' को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर सरकार ने इस कंपनी के साथ काम करना बंद कर दिया है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि इस युद्ध में एआई टूल्स का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था लेकिन एंथ्रोपिक की तकनीक पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सेना के साथ जुड़ी रही है।
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ऑपरेशन में तैनात अमेरिकी सैन्य ताकत
यूएस सेंट्रल कमांड ने उन हथियारों और सैन्य संपत्तियों की सूची जारी की है, जो इस समय ईरान के खिलाफ मैदान में हैं। इनमें कई घातक तकनीकें पहली बार इस्तेमाल हो रही हैं-
विमान और फाइटर जेट्स: हमले में B-2 स्टील्थ बॉम्बर, F-35 स्टील्थ फाइटर, F-22, F-18, F-16 और खास तौर पर टैंकों को तबाह करने वाले A-10 अटैक जेट्स शामिल हैं।
ड्रोन तकनीक: पहली बार अमेरिका ने कम लागत वाले 'सुसाइड ड्रोन्स' का इस्तेमाल किया है, जो ईरानी डिजाइन पर आधारित हैं। इनके अलावा घातक 'लुकस ड्रोन्स' और MQ-9 रीपर्स भी तैनात हैं।
मिसाइल और डिफेंस सिस्टम: लंबी दूरी तक मार करने वाली टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें, पैट्रियट इंटरसेप्टर और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाला THAAD सिस्टम सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रहा है।
नौसैनिक शक्ति: परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट करियर (विमान वाहक पोत) और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स समुद्र के रास्ते ईरान की घेराबंदी कर रहे हैं।
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अन्य सहायता: निगरानी के लिए P-8 समुद्री गश्ती विमान, RC-135 टोही विमान और रसद पहुँचाने के लिए C-17 ग्लोबमास्टर जैसे बड़े मालवाहक जहाजों का उपयोग हो रहा है।
सेंट्रल कमांड ने संकेत दिया है कि इन घोषित हथियारों के अलावा कुछ ऐसी स्पेशल हथियार या तकनीक इस्तेमाल की जा रही हैं जिनका खुलासा सुरक्षा कारणों से नहीं किया जा सकता।