स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ट्रंप की रणनीति फेल साबित हो रही है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के बावजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। ट्रंप को उम्मीद थी कि अमेरिका नाकेबंदी के बाद ईरान हताश होकर खुद ही होर्मुज को खोल देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब भी होर्मुज बंद है। ईरान की मंजूरी के बिना जहाजों के आने जाने नहीं दिया जा रहा है।
कुछ समय पहले ईरान ने होर्मुज पर टोल वसूलने की बात कही थी। तब अमेरिका समेत दुनिया ने इसकी निंदा की थी और ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि ईरान को टोल वसूलने नहीं दिया जाएगा। मगर इस बीच खबर आ रही है कि पाकिस्तान और इराक ने ईरान के साथ एक नया समझौता किया है। इसके तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दोनों देशों के एलएनजी टैंकरों को निकलने की अनुमति देगा। यह समझौता साबित करता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असल नियंत्रण ईरान का है, न कि पाकिस्तान का।
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इराक और पाकिस्तान के अलावा कई अन्य देश भी तेहरान के संपर्क में है, ताकि होर्मुज से सुरक्षित निकलने का एक समझौता किया जा सके। अगर ऐसा हुआ तो होर्मुज पर ईरान का कब्जा सामान्य हो जाएगा। मुक्त आवागमन की जगह हर देश को ईरान के साथ समझौता करना होगा। यह सब ईरान की शर्तों पर होगा।
अमेरिका और ईरान एक-दूसरे से क्या चाहते हैं?
अमेरिका चाहता है कि ईरान जल्द से जल्द होर्मुज को खोले। अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करे। संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे। वहीं तेहरान की मांग है कि युद्ध में नुकसान की भरपाई अमेरिका करे। इजरायल हमास, हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग को समाप्त करे। फारस की खाड़ी पर अमेरिकी नौसेना अपनी नाकेबंदी को तुरंत हटाए। ट्रंप ने ईरान की शर्तों को खारिज कर दिया और संकेत दिया कि युद्धविराम किसी भी वक्त टूट सकता है।
ईरान ने बढ़ाया होर्मुज का दायरा
अमेरिका से तनाव के बीच ईरान के आईआरजीसी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के क्षेत्र में विस्तार किया है। अब पूर्व में जास्क शहर से पश्चिम में सिरी द्वीप तक का क्षेत्र होर्मुज में आएगा। मतलब साफ है कि ईरान अब अधिक क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है। उसकी इस पकड़ का नतीजा है कि दुनियाभर में ऊर्जा संकट छा रहा है। उधर, अमेरिकी नौसैनिक विमान ने फारस की खाड़ी पर नाकेबंदी कर रखी है। अब तक 65 से अधिक जहाजों को वापस लौटाया गया है। चार अन्य जहाजों को तबाह कर दिया गया।
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बढ़ रही कच्चे तेल की कीमत
ब्रेंट क्रूड ऑयल वायदा की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो चुकी हैं। अमेरिका में भी महंगाई का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। 2022 के बाद यहां पेट्रोल-डीजल के दामों में सबसे अधिक इजाफा हुआ है। होर्मुज के कारण दुनियाभर में ईंधन संकट खड़ा हो गया है। कई देशों में राशनिंग सिस्टम लागू किया गया तो कई देशों गाड़ी के सम और विषम नंबर के आधार पर तेल दिया जा रहा है। भारत में भी सरकार ने लोगों से ईंधन के कम इस्तेमाल की अपील की है।