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बाप को जेल, मां को निकाला; ट्रंप ने बच्ची को वेनेजुएला क्यों भेजा?

मां-बाप से बिछड़ने वाली 2 साल की बच्ची को ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला सरकार की अपील पर वापस भेज दिया है। अप्रैल महीने में बच्ची की मां को निर्वासित किया गया था।

President of Venezuela with the girl and her grandmother.

बच्ची के साथ वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी। Photo Credit: PTI

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अपने माता-पिता से अलग होने वाली वेनेजुएला की दो वर्षीय बच्ची को डोनाल्ड ट्रंप ने उसके देश वापस भेज दिया है। मार्च महीने में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के 137 नागरिकों को अल साल्वाडोर की जेल भेजा था। इसमें बच्ची का 25 वर्षीय पिता मायकर एस्पिनोजा भी शामिल था। अगले महीने यानी अप्रैल में बच्ची की मां योरेली बर्नल को अमेरिका से वेनेजुएला निर्वासित किया गया था। इस दौरान बच्ची अपने माता-पिता से बिछड़ गई थी और अमेरिका में हिरासत में रह रही थी। बताया जाता है कि बच्ची के माता-पिता मैक्सिको की सीमा के रास्ते अमेरिका में घुसे थे। 

 

अमेरिका से अपने देश लौटी बच्ची का नाम मैकेलीस एस्पिनोजा बर्नल है। वेनेजुएला की सरकार ने अमेरिका से बच्ची की वापसी की मांग की थी। जब बच्ची अपने देश पहुंची तो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस खुद उसे लेने राजधानी कराकास के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचीं। यहां उन्होंने बच्ची को गोद में लिया।

ट्रंप प्रशासन ने क्या आरोप लगाया?


डोनाल्ड ट्रंप सरकार का आरोप है कि बच्ची के माता-पिता का संबंध वेनेजुएला के कुख्यात गिरोह ट्रेन डी अरागुआ गिरोह से है। मगर परिवार ने अमेरिका के दावों का खंडन किया। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि बच्ची का पिता ट्रेन डी अरागुआ में 'लेफ्टिनेंट' है। 

 

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अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग ने बच्ची की मां योरेली बर्नल पर नशीली दवाओं की तस्करी और यौन कामों के लिए युवतियों की भर्ती करने का आरोप लगाया है।

 

मादुरो ने की ट्रंप की तारीफ

बच्ची के सकुशल वापसी पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने ट्रंप प्रशासन का धन्यवाद किया। मादुरो ने इसे न्याय का कार्य बताया। उन्होंने ट्रंप के विशेष दूत रिच ग्रेनेल की भी तारीफ की। वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रपति मादुरो ने बच्ची को उसकी दादी मारिया एस्कलोना से मिलवाया।  

 

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ट्रंप ने किया युद्धकालीन कानून का इस्तेमाल

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रेन डी अरागुआ से जुड़े सदस्यों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसके लिए उन्होंने 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम का सहारा लिया। अक्सर इस कानून का इस्तेमाल युद्ध के समय में किया जाता है। यह कानून राष्ट्रपति को अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की शक्ति देता है। कानून लागू करने के बाद ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के लोगों को तत्काल अल साल्वाडोर जेल भेज दिया था।

क्या है ट्रेन डी अरागुआ?

'ट्रेन डी अरागुआ' गिरोह का गठन 2014 में वेनेजुएला के अरागुआ राज्य की टोकोरोन जेल में हुई थी। यह संगठन कई देशों तक फैला है। टोकोरोन जेल पर इसी गिरोह का कब्जा है। यहां पेरू, चिली और कोलंबिया में गिरोह के आपराधिक सेल हैं। यह गिरोह नशा तस्करी, यौन शोषण, अपहरण, जबरन वसूली में संलिप्त है। 

 

 


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