पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में पिछले 40 घंटों में 145 आतंकवादियों को मार गिराया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगाती ने यह दावा किया है। बलूचिस्तान में उग्रवादियों ने भीषण तबाही मचाई है। चौतरफा हुए हमलों में पाकिस्तान में 31 नागरिक और 17 से ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान मारे गए हैं। शुक्रवार और शनिवार को लगातार हुए हमलों में पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।
पाकिस्तान, बलूचिस्तान में अलगाववाद से बुरी तरह जूझ रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के जवान पाकिस्तान को गहरा जख्म दे रहे हैं। बलूच लड़ाकों ने आत्मघाती दस्ते भी तैयार किए हैं। पाकिस्तान में बलूच आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी सरकार ने इसे 'फितना अल-हिंदुस्तान' से जुड़ा बताया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दो महिला हमलावरों की तस्वीरें जारी की हैं, जो फिदायीन हमले में शामिल थीं।
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कौन हैं पाकिस्तान को तबाह करने वाली लड़कियां?
आसिफा मेंगल की उम्र सिर्फ 24 साल थी। 21 साल की जब वह हुई तो उसने बलूचिस्तान लिबरेशर आर्मी में भर्ती होने का फैसला लिया। उसका घर नुश्की इलाके में है। उसके पिता का नाम मोहम्मद इस्माइल है। वजह मजीद ब्रिगेड की फिदायीन थी। जनवरी 2024 में उसने तय किया कि अब आत्मघाती हमलावर बनेगी। असीफा ने शनिवार को नुश्की में ISI हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया।
दूसरी महिला हमलावर का नाम अभी नहीं बताया गया है। एक वीडियो में वह अपने साथी पुरुष लड़ाकों के साथ दिख रही है। वह पाकिस्तानी सरकार का मजाक उड़ा रही है। उसके हाथों में बंदूक है, वह मुस्कुरा रही है। वीडियो में वह बलोची भाषा में कहती हैं कि पाक सरकार सिर्फ हमारी मां-बहनों पर जुल्म करती है, लेकिन हमसे सीधे मुकाबला नहीं कर सकती। वह कहती है कि बलूच राष्ट्र को जागना होगा और दुश्मन से कोई समझौता नहीं होगा।
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पाकिस्तान में हो क्या रहा है?
पाकिस्तान में बलूच आंदोलन ने जोर पकड़ ली है। नुश्की, हब, चमन, नसीराबाद, ग्वादर और मकरान में बलूच विद्रोहियों ने हमले किए। हमलावरों ने स्कूल, बैंक, बाजार और अस्पतालों में घुसकर फायरिंग की। इन हमलों में करीब 50 लोग मारे गए, जिनमें कम से कम 17 सुरक्षा कर्मी शामिल थे। बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि वह पाकिस्तान की तबाही के लिए ऑपरेशन हेरोफ चला रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 40 घंटे की लड़ाई के बाद 140 से ज्यादा विद्रोहियों को मार गिराया है।
आजाद बलूच की मांग क्यों हो रही है?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। सूखे पहाड़ियों से घिरे इस राज्य में खनिज संपदाएं तो खूब हैं लेकिन इनका दोहन पाकिस्तान सरकार करती है। यह सबसे गरीब प्रांत है, जो अफगानिस्तान और ईरान से लगा हुआ है। यहां दशकों से अलगाववादी समूह आजादी की मांग कर रहे हैं। बलूच विद्रोहियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार यहां के प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सेदारी ले रही है और बलूच को कुछ नहीं मिल रहा है।
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पाकिस्तान, चीन अमेरिका सबकी बढ़ी चिंता
बलूचिस्तान में सुलगे विद्रोह की वजह से पाकिस्तान की शामत आ गई है। लगातार हो रहे हमले, अमेरिका और चीन के लिए भी चिंता की बात हैं। बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ग्वादर एयरपोर्ट को लेकर कई देश महत्वाकांक्षी हैं।
BLA ऐसे प्रोजेक्ट्स को बलूच लोगों का शोषण मानता है और चीन के खिलाफ भी हमले करता रहा है। अगर यहां अस्थिरता बढ़ी तो CPEC प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं। चीन यह हरगिज नहीं चाहेगा क्योंकि अरबों का दांव चीन, इस प्रोजेक्ट पर खेल चुकेा है। अमेरिका की आंतकवाद को लेकर चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि बलूचिस्तान आंदोलन को भारत खाद-पानी देता है। भारत इसे खारिज करता है।
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