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गाजा में 8000 सैनिक भेजेगा इंडोनेशिया, इससे मुनीर मुसीबत में क्यों फंसे?

शांति बोर्ड के तहत गाजा में सैनिक भेजने का दबाव पाकिस्तान पर बढ़ गया है। इंडोनेशिया के ऐलान के बाद से असीम मुनीर के सामने जल्द ऐलान करने का दवाब है।

Asim Munir and Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप और असीम मुनीर। ( Photo Credit: Wikipedia/Social Media)

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दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया गाजा में अपनी सेना को भेजने की तैयारी में जुटा है। वहां के सेना प्रमुख मारुली सिमांजुन्टक ने सोमवार को राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो के साथ एक मीटिंग भी की। सेना प्रमुख के मुताबिक इंडोनेशिया 500 से 8000 जवानों को गाजा भेजेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड के तहत इन सैनिकों की तैनाती की जाएगी। 

 

इंडोनेशिया के इस कदम से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि वह भी शांति बोर्ड का हिस्सा है। गाजा में अपनी सेना भेजने की बात भी कह चुका है। हालांकि वहां की सरकार के कुछ नुमाइंदों का दावा है कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। अब सवाल उठता है कि अगर पाकिस्तान ने सेना भेजने का वादा नहीं किया तो वहां एक कंपनी इस मुद्दे पर सर्वे क्यों कर रही, वह यह क्यों बता रही कि अधिकांश पाकिस्तानी गाजा में सेना भेजने के पक्ष में हैं?

 

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क्यों मुसीबत में फंसे असीम मुनीर और शहबाज शरीफ?

फरवरी महीने में वाशिंगटन में शांति बोर्ड की पहली बैठक होगी। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो समेत सभी सदस्य देश शामिल होंगे। इंडोनेशिया ने मीटिंग से पहले ही बड़ा कदम चल दिया, ताकि ट्रंप की नाराजगी न झेलनी पड़े। अभी तक पाकिस्तान ने कोई ऐलान नहीं किया है। उस पर दवाब जरूर बढ़ रह रहा है। 

 

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान भी जल्द ही अपनी सेना भेजने का ऐलान कर सकता है, लेकिन शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के सामने आवाम को मनाने की सबसे बड़ी मुश्किल है। अधिकांश पाकिस्तानी ऐसे हालत में गाजा में सेना भेजने के पक्ष में नहीं, जब इस्लामाबाद से बलूचिस्तान और केपीके तक आतंकी हमलों से धरती हिल रही हो। अब असीम मुनीर के सामने कुआं और खाई वाली स्थित है। अगर सेना नहीं भेजी तो ट्रंप का प्रकोप झेलना पड़ेगा और यदि भेजा तो आवाम का गुस्सा।

सर्वे में पाकिस्तानियों ने क्या कहा? 

असीम मुनीर को पता है कि आज नहीं तो कल दवाब बढ़ेगा। यही कारण है कि वहां गैलप पाकिस्तान नाम की एजेंसी ने एक सर्वे किया। इसमें सेना भेजने को जायज ठहराने की कोशिश की गई। 15 जनवरी से 3 फरवरी तक महज  1,600 लोगों में किया गया यह सर्वे बताता है कि करीब 73 प्रतिशत पाकिस्तानी गाजा में सेना भेजने के पक्ष में है। महज 6 प्रतिशत लोगों ने तैनाती का विरोध और 16 फीसद का मत निर्णायक नहीं रहा। अब पाकिस्तान की सेना इस सर्वे का प्रचार करने में जुटी है, ताकि सेना भेजने के उसके कदम को आवाम की मंशा बताया जा सके।

 

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गाजा में कुल कितने जवान होंगे तैनात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के तहत 20 हजार से अधिक विदेशी सैनिकों को तैनात किया जाएगा। इनमें करीब आठ हजार जवान इंडोनेशिया के होंगे। हालांकि इंडोनेशिया ने यह नहीं बताया कि उसके जवानों की तैनाती कहां होगी। इस बीच इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि  इंडोनेशियाई सैनिकों को राफा और खान यूनिस में तैनात किया जाएगा। अजरबैजान को छोड़कर लगभग सभी मुस्लिम देशों ने अपने सैनिकों को भेजने पर हामी भरी है।

अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन का मकसद क्या है? 

मौजूदा समय में गाजा के 53 फीसद हिस्सा पर इजरायली सेना का कब्जा है। आईएसएफ के तहत इजरायल की सेना को धीरे-धीरे गाजा से हटाया जाएगा। वहीं हमास के नियंत्रण वाले हिस्से को हथियार विहीन बनाया जाएगा। हालांकि हमास साफ कर चुका है कि वह हथियार नहीं छोड़ेगा।


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