28 फरवरी से इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी है। 3 मार्च तक संयुक्त अरब अमीरात पर ईरान 100 से अधिक बार हमला कर चुका है, जबकि यूएई जंग का हिस्सा भी नहीं है। अकेले गुरुवार को ही यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने छह बैलेस्टिक मिसाइल और 125 ड्रोनों को मार गिराया है। मौजूदा जंग में खाड़ी देशों में सबसे अधिक मार यूएई को ही झेलनी पड़ी है। हालांकि अभी तक उसने ईरान पर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है। अब सवाल यह उठता है कि इजरायल से भी अधिक हमले यूएई को क्यों झेलने पड़े, जबकि उसकी ईरान से सीधी दुश्मनी भी नहीं है।
यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पांच मार्च को सात बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया। इनमें से छह को सफलतापूर्वक रोक दिया गया। एक मिसाइल देश के भीतर गिरने में कामयाब रही। वहीं 131 ड्रोन से हमला किया गया। इनमें से 125 को रोक लिया गया। छह ड्रोन सुरक्षा को भेदने में सफल रहे। मंत्रालय का कहना है कि जंग शुरू होने से अब तक 189 बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। एयर डिफेंस सिस्टम ने 175 को सफलतापूर्वक गिरा दिया। बाकी मिसाइलें देश की सीमा के भीतर गिरीं।
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UAE पर 1000 से अधिक हमले
3 जनवरी को यूएई के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि देश पर एक हजार से अधिक हमले हो चुके हैं। यह आंकड़ा अन्य सभी देशों पर हुए हमलों की कुल संख्या से भी अधिक है। यह भी कहा कि हमने युद्ध में भाग नहीं लिया है और न ही ईरान के खिलाफ किसी भी हमले में अपने क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत दी। बावजूद इसके उसे लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
सिर्फ अमेरिकी ठिकानों तक हमले सीमित नहीं
ईरान के ड्रोन और मिसाइलों ने यूएई में न केवल अमेरिकी ठिकानों बल्कि होटलों, सरकारी इमारतों, दूतावास, तेल और गैस के ठिकाने व पर्यटन स्थलों को भी निशाना बना रहे हैं। तेहरान ने यूएई पर करीब करीब उतने ही हमलों को अंजाम दिया, जितने उसने इजरायल पर किए। मतलब साफ है कि ईरान अपनी नीति में यूएई और इजरायल को एक नजरिये से देखता है। मगर इसकी वजह क्या है... आइये इसको भी समझते हैं।
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यूएई पर अधिक हमले क्यों कर रहा ईरान?
- यमन के लिए अमेरिकी उप विशेष दूत और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अरब प्रायद्वीप मामलों की निदेशक रह चुकीं एलिसन माइनर ने थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में लिखा कि यूएई पर ईरान की इतनी आक्रामकता के पीछे की वजह तो नहीं पता। मगर तेहरान को शायद लगता है कि यूएई अमेरिका पर दबाव डालकर सैन्य अभियान को रोक सकता है।
- दुबई न केवल यूएई बल्कि दुनियाभर की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। उसकी पहचान एक शांत, सुरक्षित और स्थिर व्यापारिक केंद्र के तौर पर ऊभरी। एलिसन ने आगे लिखा कि संयुक्त अरब अमीरात ने दशकों तक दुबई को स्थिरता के प्रतीक के रूप में वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। यह प्रतिष्ठा यूएई के आर्थिक दृष्टिकोण का एक प्रमुख आधार है। यूएई के जीडीपी का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा गैर-तेल क्षेत्रों से आता है और ये क्षेत्र आर्थिक विकास के प्राथमिक स्रोत हैं।
- संयुक्त अरब अमीरात की इजरायल से नजदीकी भी खूब है। वह खाड़ी एक इकलौता देश है, जिसने इजरायल को मान्यता दे रखी है। वह लगातार सैन्य और अन्य रणनीतिक साझेदारी भी बढ़ा रहा है। सोमालीलैंड के मामले भी इजरायल और यूएई एक ही पेज पर खड़े हैं। दोनों देश सुरक्षा सहयोग करते हैं। खुफिया जानकारी साझा भी करते हैं। दोनों देशों के तकनीकि और सुरक्षा साझेदारी को ईरान खतरा मानता है। हमले के पीछे एक यह भी वजह हो सकती है।
- हमले की सबसे अहम वजह यूएई में अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। अल दाफ्रा एयरबेस पर अमेरिका सेना तैनात है। हमले से पहले ही ईरान ने स्पष्ट कर दिया था कि जवाबी कार्रवाई में इलाके में स्थित हर अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि अगर उसका निशाना अमेरिका है तो वह सैन्य अड्डे के अलावा अन्य जगहों पर हमला क्यों कर रहा है। इसकी एक वजह यूएई का वित्तीय केंद्र होना। माना जा रहा है कि यूएई पर अधिक हमले करके ईरान कूटनीतिक दबाव बना रहा है।
- ईरान इन हमलों से यूएई की वित्तीय केंद्र के तौर पर उभरी तस्वीर को भी तोड़ने की कोशिश कर रहा है। उनका मानना है कि अगर यूएई के शहरों में भीषण तबाही मचाई गई तो दुनिया में इसका प्रभाव अधिक होगा, क्योंकि दुबई जैसै शहर में सिर्फ यूएई के हित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। अगर यहां कुछ बड़ा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका असर होगा। दुबई की इसी मजबूती को ईरान कमजोरी में तब्दील करने में जुटा है।