कतर के सरकारी मीडिया अल जजीरा की रिपोर्ट पाकिस्तान और वहां के लोगों को पसंद नहीं आ रही है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पाकिस्तान ने अल जजीरा पर बैन लगा दिया है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई ऐलान नहीं किया। यह बात साफ है कि पाकिस्तान की सरकार को बलूचिस्तान हमले और बाद में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक पर की गई अल जजीरा की रिपोर्ट पंसद नहीं आई है। पाकिस्तान की जनता अल जजीरा पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का आरोप लगा रही है। आइये समझते हैं पूरा मामला...
बलूचिस्तान पर रिपोर्टिंग: 31 जनवरी को अल जजीरा ने अपनी वेबसाइट पर बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के कोऑर्डिनेटेड हमले की खबर प्रकाशित की। इसमें बीएलए के लड़ाकों को अलगाववादी बताया गया। कुछ जगह बलूच बंदूकधारी लिखा गया। यह भी कहा कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान दशकों से अलगाववाद से जूझ रहा है। अल जजीरा की यह रिपोर्टिंग पाकिस्तान सेना और वहां की सरकार के नैरेटिव से बिल्कुल विपरीत है, जिसके तहत पाकिस्तान बलूच लड़ाकों को दहशतगर्द बताता है।
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केपीके हमला: 21 फरवरी को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में टीटीपी के आत्मघाती हमले में पांच पाकिस्तानी सैनिकों की जान गई। अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में टीटीपी के आंतिकयों को लड़ाका और हथियारबंद लड़ाका व विद्रोही गुट के तौर पर संबोधित किया। जबकि पाकिस्तान की सरकार इन्हें आतंकी कहती है और पड़ोसी देश अफगानिस्तान पर शरण देने का आरोप लगाती है। टीटीपी के बहाने पाकिस्तान अफगानिस्तान पर कई बार बमबारी कर चुका है।
अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक: पाकिस्तान ने 21 फरवरी की रात अफगानिस्तान के तीन जिलों में बमबारी की। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके हमले में दर्जनों दहशतगर्दों की जान गई है, जबकि अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नागरिकों की जान गई और एक ही परिवार के 23 सदस्यों की मौत हुई है। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तान पत्रकार और सरकार के करीबी अल जजीरा पर तालिबान के पक्ष में रिपोर्टिंग करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि मीडिया हाउस एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है।
भारत का नक्शा: कुछ समय पहले अल जजीरा ने भारत का एक नक्शा प्रकाशित किया था। इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत भारत के अभिन्न अंग के तौर पर दिखाया गया था। इससे भी पाकिस्तान की सेना और सरकार के करीबी बेहद खफा हुए थे। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं जब पाकिस्तान ने अल जजीरा की रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताई है। पिछले साल भी इस्लामाबाद ने इमरान खान मामले, सीमा पर झड़प समेत सियासी मुद्दों पर एकतरफा रिपोर्टिंग का आरोप लगाया था।
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विवाद की वजह-
- अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत को प्राथमिकता देने पर पर पाकिस्तान नाराज है।
- पाकिस्तान सरकार के नजरिये से अलग रिपोर्टिंग भी रास नहीं आई।
- पाकिस्तानियों ने सरकारी एजेंडा को कमजोर करने का आरोप लगाया।
सेना की साजिश: कुछ समय पहले एक लीक दस्तावेज में खुलासा हुआ था कि पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ने अल जजीरा के खिलाफ कोऑर्डिनेटेड मीडिया अभियान चलाने का निर्देश दिया था। इसमें तालिबान के खिलाफ भी अभियान चलाने की बात कही गई थी। इसमें कहा गया कि अल जजीरा कतर के राजनयिक उद्देश्यों के साथ काम करता है। राज्य की नीति को प्रतिबिंबित करने वाले संपादकीय रुझान प्रसारक की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।