मणिपुर के उखरुल जिले में एक बार फिर हिंसा भड़की है। कुकी समुदाय के कुछ लोगों ने 18 से ज्यादा नागा समुदाय के लोगों को बंधक बना लिया है। बंधकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। नागा समुदाय के लोग 3 अलग-अलग गाड़ियों में कुकी बाहुल इलाकों से गुजर रहे थे। जैसे ही गाड़ी, शंगकाई इलाके के थवाई कुकी गांव में रुकी, कुकी समुदाय के कुछ लोगों ने गाड़ी रोकी और उन्हें बंधक बना लिया।
थवाई गांव, मणिपुर के लिटन पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। नागा समुदाय के जिन लोगों को बंधक बनाया गया है, उनके घरवाले लगातार उन्हें फोन कर रहे थे, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। बंधकों के मोबाइल फोन तक छीन लिए गए थे। बंधक बनाया गया समूह एक शादी समारोह में हिस्सा लेने जा रहा था। अफीम की खेती से शुरू हुआ यह विवाद, अब राज्य में हंगामे की वजह बन गया है।
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विवाद क्यों भड़का है?
मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में अफीम की खेती खूब होती है। नागा समुदाय के कुछ लोगों ने अफीम की खेती के खिलाफ अभियान शुरू किया था। एक कुकी किसान को नागा समुदाय के लोगों ने पकड़ लिया था। जवाब में कुकी समुदाय के लोगों ने नागा समुदाय के लोगों को बंधक बना लिया।
कैसे इतना बढ़ गया विवाद?
शांगकाई गांव के लोगों ने आरोप लगाया है कि 'टंगखुल वॉलंटियर्स' ने पहले कुकी किसानों पर गोलीबारी की, जिसमें एक शख्स घायल हो गया, दो लापता हो गए। टांगखुल, नागा समुदाय का एक संगठन है। ये लोग अपने गांवों और समुदाय की सुरक्षा के लिए संगठिन हुए स्थानीय लोग है। टांगखुल मणिपुर का सबसे बड़ा नागा जनजातीय समूह है। इस समुदाय के ज्यादातर लोग उखरुल और कमजोंग जिलों में रहते हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा, 'बंधकों को रिहा कराए पुलिस'
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंधकों को जल्द से जल्द सुरक्षित छुड़ाया जाए और जिले में स्थिति को नियंत्रित रखा जाए।
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और बंधकों को तुरंत, बिना शर्त छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
अब आगे क्या?
जिले की प्रमुख नागा संस्था टंगखुल नागा लॉन्ग, ने मुख्यमंत्री को पूरे मामले पर चिट्ठी लिखी है। संगठन का कहना है कि मानवाधिकारों और संविधान का उल्लंघन है। उनकी मांग है कि सरकार बंधकों को तुरंत छुड़ाए, वरना कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम होगा।