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कैसे काम करता है आर्टिफिशियल हार्ट, 100 दिनों तक जिंदा रहा व्यक्ति

मेडिकल के इतिहास में चमत्कार हुआ है। एक व्यक्ति 100 दिनों तक आर्टिफिशिल हार्ट पर जिंदा रहा। आइए जानते हैं ये तकनीक कैसे काम करती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Freepik)

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विश्वभर में हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर से लाखों मौतें होती हैं। ऐसे में मेडिकल के इतिहास में इस खबर ने इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रेलिया में एक व्यक्ति पूरे 100 दिनों तक टाइटेनियम से बने हार्ट पर 100 दिनों तक के लिए जिंदा रहा। इसके बाद उसके दिल में डोनर के हार्ट को ट्रांसफर कर दिया गया। इस व्यक्ति का हार्ट पूरी तरह से फेल हो चुका था। डॉक्टर की टीम ने उस व्यक्ति के हार्ट में आर्टिफिशियल हार्ट को लगाया जो बिल्कुल नेचुरल तरीके से काम कर रहा था। इस आर्टिफिशियल हार्ट को डॉक्टर डैनियल टिम्स की ने डिजाइन किया था।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये व्यक्ति 22 नंवबर को सिडनी के सेंट विंसेंट्स अस्पताल में भर्ती हुआ था। मरीज का हार्ट पूरी तरह से फेल हो चुका था। डोनर नहीं मिलने पर डॉक्टर्स की टीम ने 6 घंटे की सर्जरी के बाद आर्टिफिशियल हार्ट को इम्प्लॉन्ट किया था। 100 दिनों के बाद इस व्यक्ति को डोनर मिला है।

 

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क्यों बनाया गया आर्टिफिशियल हार्ट

 

हार्ट फेल होने के बाद मौत निश्चत मानी जाती है। कई बार कई डोनर नहीं मिलने पर आर्टिफिशियल हार्ट लगाया जाता है ताकि यह सामान्य हार्ट की तरह काम करता रहे। डैनियल टिम्स ने कहा कि मरीज को 100 दिनों तक इस बाद का एहसास नहीं हुआ कि उसके अंदर आर्टिफिशियल हार्ट फिट हुआ है। वह अपने रोजमर्रा के काम आसानी से कर रहा था।

 

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किस तरह से काम करता है आर्टिफिशियल हार्ट

 

ये आर्टिफिशियल हार्ट BiVACOR है जिसमें कोई वॉल्व नहीं होता है। इसमें खून की पंपिंग का काम मोटर द्वारा किया जाता है। ये मोटर बैटरी से चलता है। ये दुनिया का पहला इम्प्लांटेबल रोटरी रक्त पंप है जो खून को बिना किसी बाधा के खून को पंप करता है। ये रोटरी पंप आसानी से हृदय में फिट हो जाता है। ये हार्ट के दोनों चैंबर दाये और बाये वेंट्रिकल्स की जगह ले लेता है। इसका वजन 650 ग्राम है। 

 

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