logo

ट्रेंडिंग:

2025 में मौसम बना जानलेवा, 4000 से ज्यादा मौतें, डराने वाले आंकड़े आए सामने

CSE और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट ‘क्लाइमेट इंडिया 2025’ के अनुसार, 2025 में कई चरम मौसमी घटनाएं हुई है। पहले 9 महीनों में हुए चरम मौसमी घटनाओं के कारण देश भर में करीब 4000 से ज्यादा अधिक लोगों की जान गई।

Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

हमें मौसम में हो रहे बदलाव साफ तौर पर महसूस हो रहे हैं। इस अनुभव को रिसर्च के जरिये सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) और डाउन टू अर्थ ने अपनी रिपोर्ट ‘क्लाइमेट इंडिया 2025’ में सामने रखा है। इस रिपोर्ट में मौसम से जुड़े ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने लोगों को चौंका दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के पहले नौ महीनों में देश के 273 में से 217 दिन किसी न किसी तरह की चरम मौसमी घटनाओं से प्रभावित रहे। इन घटनाओं के चलते पूरे देश में करीब 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

 

चरम मौसमी घटनाओं में लू, शीत लहर, आंधी-तूफान, भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने जैसी घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1957 के बाद अब तक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका असर न सिर्फ दुनिया बल्कि भारत में भी साफ दिखाई दे रहा है।

 

यह भी पढ़ें- कैसे कम होगा प्रदूषण? पैसा मिला लेकिन खर्च ही नहीं कर पाए दिल्ली-नोएडा

बदलती जलवायु का कड़वा सच

'इंडिया क्लाइमेट 2025: असेसमेंट ऑफ एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स' रिपोर्ट में भारत के बदलते मौसम के मिजाज और जलवायु संकट की एक भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के आंकड़े-

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 के पहले 11 महीनों के 334 दिनों में से 331 दिन किसी न किसी रूप में चरम मौसमी घटनाओं का सामना किया।
  • चरम मौसमी घटनाओं के कारण पूरे देश में लगभग 4000 से ज्यादा लोगों की जान गई।
  • इसकी वजह से करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल क्षेत्र पर असर पड़ा, जो पिछले वर्षों के मुकाबले एक बहुत बड़ा उछाल है।
  • इसके कारण 1.8 लाख से अधिक घर तबाह हुए और लगभग 77,000 जानवरों की मृत्यु दर्ज की गई।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में सबसे ज्यादा दिन चरम मौसमी घटनाओं को दर्ज किया गया है। इसमें 273 में से 257 दिन इस तरह की घटनाओं का प्रकोप जारी रहा।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा दंश झेलने वाले राज्यों में चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं।

क्षेत्रीय प्रभाव

रिपोर्ट बताती है कि अब भारत का कोई भी राज्य जलवायु संकट से अछूता नहीं है-

  • हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां साल के 80% से ज्यादा दिनों में चरम मौसम दर्ज किया गया। यहां 273 में से 217 दिन चरम मौसमी घटनाएं रिकॉर्ड की गई। इसके बाद केरल में 147 दिन और मध्य प्रदेश ने 144 दिन आपदाओं का दंश झेला।
  • मध्य प्रदेश में सबसे अधिक (532) मौतें हुईं, उसके बाद आंध्र प्रदेश और झारखंड का स्थान रहा।
  • महाराष्ट्र फसल नुकसान के मामले में सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा (लगभग 8.4 मिलियन हेक्टेयर)।

मौसमी रिकॉर्ड का टूटना

2025 की रिपोर्ट कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स की ओर इशारा करती है जो पिछले 100 सालों में नहीं देखे गए। जैसे-

  • 1901 के बाद से भारत की पांचवीं सबसे ड्राई या सूखा जनवरी रहा।
  • पिछले 124 वर्षों में सबसे गर्म फरवरी दर्ज की गई।
  • जून से सितंबर के सभी 122 दिनों में देश के किसी न किसी हिस्से में भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति रही।

 

यह भी पढ़ें- 'आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दिन है..', बेटे की मौत पर बोले अनिल अग्रवाल

रिपोर्ट हमें क्या चेतावनी दे रही है?

CSE की इस रिपोर्ट का विश्लेषण तीन मुख्य चिंताओं को उजागर करता है। जैसे-

  • पहले चरम मौसमी घटनाएं कभी-कभार होती थीं लेकिन अब यह 'हर दिन की घटना' बन गई है। 99% दिनों में चरम मौसम का होना यह दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की बात नहीं, वर्तमान की हकीकत है।
  • 'हीटवेव' अब केवल गर्मियों तक सीमित नहीं है। पहाड़ों पर भी तापमान सामान्य से बहुत ऊपर जा रहा है। इसी तरह, 'कोल्डवेव' और 'क्लाउडबर्स्ट' (बादल फटना) की घटनाएं अब उन क्षेत्रों में भी हो रही हैं जहां पहले ये नहीं होती थीं।
  • इतनी बड़ी मात्रा में फसलों का नुकसान भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।
  • यह रिपोर्ट इस बात का साफ संकेत दे रही हैं कि भारत में जलवायु संकट तेजी से गहरा रहा है। चरम मौसम अब केवल मौसमी असामान्यता नहीं बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया है।
Related Topic:#Climate Change

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap