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वायु प्रदूषण से हर दिन 5496 मौतों का दावा, सरकार बोली- कोई पक्का डेटा नहीं

वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए कोई डेटा नहीं है। पर कई स्टडी बताती हैं कि वायु प्रदूषण से लाखों मौतें हो जाती हैं।

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प्रतीकात्मत तस्वीर। (Photo Credit: PTI)

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दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में हवा जहरीली बनी हुई है। वायु प्रदूषण को लेकर तमाम तरह की एडवाइजरी जारी की जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार ने संसद में जवाब दिया है कि वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली मौतों या बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए कोई ठोस डेटा नहीं है। सरकार की तरफ से यह जवाब ऐसे समय आया है, जब राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में AQI का स्तर 400 तक पहुंच गया है।


वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और बीमारियों को लेकर टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सवाल किया था। इसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, 'वायु प्रदूषण सांस और उससे जुड़ी बीमारियों के लिए ट्रिगर करने वाले फैक्टर में से एक है।'

 

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सवाल क्या था? सरकार ने क्या कहा?

टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछा था कि क्या यह सच है कि 2022 में PM2.5 की वजह से 17 लाख मौतें हुई थीं? क्या यह भी सच है कि वायु प्रदूषण से जीडीपी को 9.5 फीसदी का नुकसान हुआ है?


उन्होंने पूछा था कि पिछले 5 साल में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वायु प्रदूषण से कितनी मौतें हुईं हैं? और PM2.5 को कम करने के लिए सरकार ने क्या योजना बनाई है?


जवाब देते हुए स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, 'देश में ऐसा कोई पक्का डेटा उपलब्ध नहीं है जो सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली मौत या बीमारी का सीधा संबंध स्थापित कर सके। वायु प्रदूषण सांस और इससे जुड़ी बीमारियों के लिए ट्रिगर करने वाले कारकों में से एक है।'

 


उन्होंने बताया कि इंसान के शरीर पर वायु प्रदूषण के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, 'वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव कई फैक्टर्स का मिला-जुला नतीजा है। इसमें लोगों के खान-पान की आदतें, काम करने की आदतें, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और इम्युनिटी वगैरह शामिल हैं।'

 

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लेकिन वायु प्रदूषण से मारे जा रहे लोग!

सरकार कह रही है कि वायु प्रदूषण और उससे होने वाली मौतों और बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाला कोई डेटा नहीं है। लेकिन कई रिपोर्ट्स में सामने आ चुका है कि भारत में हर साल लाखों लोग वायु प्रदूषण के कारण मारे जा रहे हैं।


स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर (SAGA) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में मौतों का दूसरा बड़ा कारण वायु प्रदूषण है। यह रिपोर्ट बताती है कि 2023 में दुनियाभर में वायु प्रदूषण से 79 लाख मौतें हुई थीं। भारत और चीन में 20-20 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।


 2023 में वायु प्रदूषण की वजह से भारत में 20.06 लाख लोगों की मौत हुई थी। 2022 की तुलना में 2023 में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतें लगभग 4 फीसदी बढ़ गई थीं। 2022 में भारत में 19.34 लाख मौतें हुई थीं। इन आंकड़ों के हिसाब से भारत में जहरीली हवा के कारण हर दिन औसतन 5,496 लोगों की मौत हो रही है। इस हिसाब से हर घंटे औसतन 229 लोग मारे जा रहे हैं।


वहीं, साइंस जर्नल लैंसेंट में छपी एक स्टडी में अनुमान लगाया गया था कि वायु प्रदूषण की वजह से भारत में 15 लाख मौतें हुई थीं। यह 2023 का अनुमान था। इस स्टडी में अनुमान लगाया गया था कि दिल्ली में 2023 में 15% मौतों की वजह वायु प्रदूषण थी।


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