पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने शनिवार को चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल में फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की समय-सीमा सात दिन बढ़ाने का अनुरोध किया है। इसके लिए उन्होंने पत्र लिखा है। उन्होंने सुनवाई पूरी होने, वेरिफिकेशन और डेटा अपलोडिंग में देरी का हवाला दिया। CEO कार्यालय का कहना है कि इस वजह से फाइनल लिस्ट जारी नहीं हो पा रही।
पहले यह लिस्ट पर 7 फरवरी तक सुनवाई होनी थी, जबकि फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित होना था। लेकिन अब इसके फरवरी के अंतिम सप्ताह तक खिसकने के संकेत मिल रहे हैं।
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CEO ने बताया देरी का कारण
राज्य में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है। CEO मनोज अग्रवाल ने कहा, 'हमें कुछ जिला निर्वाचन अधिकारी से डेडलाइन बढ़ाने के बारे में कुछ प्रस्ताव मिले हैं। जिलों से डेटा इकट्ठा करने और जांचने के बाद, हमने चुनाव आयोग सुनवाई की आखिरी तारीख 7 फरवरी से बढ़ाकर 14 फरवरी करने का अनुरोध किया है।'
CEO ने कहा, 'मैंने सात से आठ जिला चुनाव अधिकारियों से इनपुट मिलने के बाद सुनवाई की आखिरी तारीख सात दिन बढ़ाने की अपील की है। कुछ जगहों पर सुनवाई की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है, जबकि दूसरी जगहों पर AERO और ERO द्वारा अपलोडिंग, वेरिफिकेशन और आखिरी फैसले अभी भी बाकी हैं।'
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SIR प्रक्रिया पर बंगाल में घमासान
वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर बंगाल की सियासत भी गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया से जुड़ी घटनाओं में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। टीएमसी का कहना है कि इस प्रक्रिया की वजह से बंगाल में तनाव, हिंसा और विरोध-प्रदर्शन बढ़े। बता दें कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई हैं, जहां उन्होंने खुद अपनी बात रखी।
बीजेपी ने दी प्रतिक्रिया
वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि टीएमसी जानबूझकर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को काम में अड़ंगा के निर्देश दे रही है, जिससे पूरी SIR प्रक्रिया लटकी हुई है। उन्होंने कहा कि टीएमसी संवैधानिक संकट पैदा करना चाहती है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी।
पश्चिम बंगाल में इसी साल अप्रैल महीने में विधानयभा चुनाव हो सकते हैं।