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45 दिन में नहीं ढूंढी दुलहन, मैट्रिमोनी साइट को देना पड़ा जुर्माना

मैट्रिमोनी पोर्टल को अब सावधान होने की जरूरत है। एक साइट पर दुलहन न ढूंढ पाने पर कोर्ट ने ऐसे लताड़ा है, जिसे जानकर शादी कराने वाले धंधे में शामिल लोगों के कान खड़े हो जाएंगे। समझिए क्या है माजरा।

Bengaluru Court

बेंगलुरु की एक शादी कराने वाली एजेंसी पर कोर्ट ने फाइन लगाया है, वजह दिलचस्प है। (सांकेतिक तस्वीर- Meta AI)

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बेंगलुरु के एक कंज्युमर कोर्ट ने एक दुलहन न ढूंढ पाने पर एक मेट्रिमोनी साइट को ऐसी फटकार लगाई है, जो कई दुलहन ढूंढने वाली एजेंट्स के लिए सबक है। बेंगलुरु के रहने वाले विजय कुमार केएस अपने बेटे बालाजी के लिए एक दुलहन ढूंढ रहे थे। 

उन्होंने दिलमिल मैट्रिमोनी पोर्टल ढूंढ निकाला। कल्याण नगर में इस मैट्रिमोनी पोर्टल का एक दफ्तर था। 17 मार्च को विजय अपने बेटे की शादी के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज और फोटो लेकर दिलमिल मेट्रिमोनी आए। इस संस्था ने उनसे 30,000 रुपये मांग लिए। विजय कुमार ने पूरा पेमेंट कर दिया। संस्था ने वादा किया वह उनके बेटे के लिए दुलहन ढूंढकर देगा। 

45 दिन में दुलहन ढूंढने का वादा
दुलहन ढूंढने की टाइमलाइन 45 दिन थी। दिलमिल मैट्रिमोनी ने कहा था कि बालाजी के लिए इतने दिनों के भीतर दुलहन ढूंढ निकालेंगे। बालाजी कुंवारे ही रह गए, मैट्रिमोनी साइट उनके लिए दुलहन ही नहीं ढूंढ पाई। जब 30 अप्रैल को विजय कुमार, दिलमिल के दफ्तर गए तो संस्था के लोगों ने इन्हें गाली दी और मारपीट की। 

नहीं ढूंढ पाए दूल्हे के लिए परफेक्ट मैच
9 मई को विजय कुमार ने दिलमिल मैट्रिमोनी को एक नोटिस भेजा लेकिन जवाब नहीं आया। 28 अक्तूबर को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'शिकायतकर्ता को अपने बेटे के लिए परफेक्ट मैच नहीं मिला, जब शिकायतकर्ता मैट्रिमोनी पोर्टल में गया, तब भी उन्होंने उसकी नहीं सुनी और पैसे वापस नहीं किए।'

कोर्ट ने इस वादे को बताया अनफेयर ट्रेड
कमीशन के चेयरमैन रामचंद्र एम एस ने अपने आदेश में कहा, 'कमीशन यह मानता है कि पीड़ित पक्ष को सर्विस देने में मैट्रिमोनी पोर्टल ने अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं किया है, यह अनुचित ट्रेड में शामिल है. पीड़ित पक्ष को राहत दी जाए, उनकी रकम लौटाई जाए।'

कोर्ट ने लगाया 60 हजार जुर्माना
कोर्ट ने फीस के तौर पर 30,000 रुपये लेने, सर्विस में कमी के लिए 20,000 रुपये, मानसिक पीड़ा देने के लिए 5000 रुपये और केस फाइल करने के लिए 5000 रुपये देने का आदेश दिया है। 

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