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आटा चक्की में बन रहा था आतंक का पाउडर, दिल्ली बम कांड में नया खुलासा

डॉ मुजम्मिल गनी ने किराए की आटा चक्की को केमिकल लैब बना रखा था। इसमें मुजम्मिल ने अमोनियम नाइट्रेट को पीसने का काम किया था।

Dr Muzammil । Photo Credit: Social Media

डॉ मुजम्मिल । Photo Credit: Social Media

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एक साधारण सी दिखने वाली आटा चक्की में आतंक का सामान पीसा जा रहा था। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज गांव में एक टैक्सी ड्राइवर के घर से जो तस्वीरें और सामान बरामद हुआ है, उसने जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं।

 

दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के बाहर हुआ कार बम धमाका जिसमें 15 लोग मारे गए थे, उसके मुख्य सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल गनी ने अपनी किराए की आटा चक्की को केमिकल लैब बना रखा था।

 

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आटा चक्की में भारी रोलर या ब्लेड होते हैं जो अनाज को बारीक पीसते हैं। जांचकर्ताओं के मुताबिक मुजम्मिल ने इसी चक्की का इस्तेमाल रासायनिक पदार्थों (खासकर अमोनियम नाइट्रेट) को महीन पाउडर बनाने में किया। महीन पाउडर होने से विस्फोटक बनाना आसान हो जाता है और उसकी ताकत भी बढ़ जाती है।

2600 किलो विस्फोटक का जखीरा

धमाके से ठीक एक दिन पहले एक पुराना वीडियो फिर से सामने आया था जिसमें दिखाया गया था कि मौलवी के एक सुनसान घर में 2600 किलो अमोनियम नाइट्रेट छिपाकर रखा गया था। इसी घर में मुजम्मिल ने महज 1500 रुपये महीना किराए पर कमरा ले रखा था। पिछले हफ्ते इसी जगह से करीब 3000 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है।

दो साल से चल रही थी साजिश

जांच में पता चला है कि यह आतंकी साजिश पिछले दो साल से भी ज्यादा समय से रची जा रही थी। आरोपी डॉ. मुजम्मिल गनी और उमर उन्नबी (जिसकी i20 कार में धमाका हुआ था) दोनों अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। उमर साल 2021 में यूनिवर्सिटी आया जबकि मुजम्मिल 6 महीने बाद एडमिशन लिया था। दोनों ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में कमरा नंबर 13 और कमरा नंबर 4 लिया था। इन कमरों से बरामद डायरियों और नोटबुक ने पूरी साजिश खोल दी।

डायरियों में लिखा था खौफनाक प्लान

डायरी के पन्नों पर बार-बार 'ऑपरेशन' शब्द का जिक्र किया गया था साथ ही 8 से 12 नवंबर की तारीखों के साथ कोड में नाम और नंबर भी लिखे थे। इससे संकेत मिलता है कि केवल एक नहीं बल्कि कई हमलों की प्लानिंग की गई थी। डायरी में 2530 लोगों के नाम लिखे थे जो कि ज्यादातर जम्मू-कश्मीर, फरीदाबाद और आसपास के इलाकों के थे।

 

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जांच एजेंसियां इसे 'व्हाइट कोट टेरर मॉड्यूल' कह रही हैं क्योंकि दोनों आरोपी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन साथ-साथ आतंक की तैयारी भी कर रहे थे। अब पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि डायरियों में लिखे 2530 नामों में से कितने लोग इस साजिश का हिस्सा थे या सिर्फ निशाने पर थे।


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