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पॉल्यूशन मीटर फेल, औसतन AQI 300 पार, दिल्ली में सांसों पर संकट, वजह क्या रही?

दिल्ली के कई इलाकों में वायु की गुणवत्ता खराब स्थिति में पहुंच गई है। सुबह-सुबह सड़कों पर धुंध नजर आ रही है। दीपावली के बाद दिल्ली का हाल क्या है, आइए जानते हैं।

Delhi Air Pollution

दिल्ली में 5 साल में सबसे ज्यादा प्रूदषण नजर आया है। Photo Credit: PTI

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दिल्ली में दीपावली के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) औसतन 300 पार है। अक्षरधाम से लेकर आनंद विहार तक एक जैसा हाल है। दीपावली पर हुई आतिशबाजी के बाद दिल्ली की हवा में अब प्रदूषण का जहर घुल गया है। ऐसे संवेदनशील वक्त में, जब प्रदूषण की सटीक जानकारी जरूरी थी, तब शहर के कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQM) घंटों तक बंद रहे।

दिल्ली में कुल 39 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन है। दीपावली में कई घंटों तक ये स्टेशन बंद रहे। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 9 स्टेशन लगातार काम कर रहे थे, जिसमें सिर्फ 23 फीसदी संयंत्रों ने ही लगातार डेटा दर्ज किया। बाकी स्टेशनों में 1 से 9 घंटे तक डेटा गायब रहा।

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कहां-कहां रही खामियां?

द्वारका सेक्टर 8 का स्टेशन सबसे खराब रहा, जहां 36 घंटों में केवल 27 घंटे का डेटा उपलब्ध था। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नेहरू नगर, पटपड़गंज और आरके पुरम जैसे स्टेशनों में करीब 8 घंटे का डेटा गायब रहा। 10 स्टेशनों में 6 घंटे या उससे ज्यादा समय तक कोई जानकारी नहीं मिली। यह वही वक्त था, जब दिल्ली में प्रदूषण अपने चरम पर था, पटाखे जमकर फोड़े जा रहे थे।

प्रदूषण का स्तर खतरनाक

जहां डेटा उपलब्ध था, वहां स्थिति भयावह थी। मंदिर मार्ग स्टेशन पर पीएम 2.5 का स्तर रात 12 बजे 1,066 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, फिर 1 से 4 बजे तक डेटा गायब रहा। नेहरू नगर,दिवाली की रात सबसे प्रदूषित रहा, वहां पीएम 2.5 का स्तर 1,763 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा। सीपीसीबी के आईटीओ स्टेशन पर 1 बजे 923 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ और फिर वह बंद हो गया।

क्यों गायब हो रहा डेटा?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर साल दीवाली के दौरान जब प्रदूषण बढ़ता है, कई स्टेशन डेटा देना बंद कर देते हैं। कुछ स्टेशनों पर तकनीकी सीमा है, जिसके कारण 1,000 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा प्रदूषण होने पर डेटा रिकॉर्ड नहीं हो पाता। आनंद विहार और मुंडका में इससे ज्यादा प्रदूषण भी दर्ज किया गया। तकनीक उपलब्ध है, लेकिन इसे अपग्रेड करने की जरूरत है।

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दिल्ली सरकार का क्या जवाब है?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि सारा डेटा सीपीसीबी और डीपीसीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि डेटा गायब होने की बात करने वालों के इरादे ठीक नहीं हैं। 

डेटा में अंतर क्यों आता है?

दिवाली और सर्दियों में यह समस्या आम है। साल 2022 और 2023 में भी इनमें अंतर देखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह समस्या हर साल दीवाली और सर्दियों में दोहराई जाती है। 2022 और 2023 में भी ऐसे डेटा गैप देखे गए। दिल्ली के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों को अलग-अलग एजेंसियां चला रहीं हैं। AQI का डेटा बेहद अहम है। अगर प्रदूषण को नियंत्रित करना है तो मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत पड़ेगी। 

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