आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल से जुड़े मुकदमे इन दिनों खूब चर्चा में हैं। आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को अपने केस से हटाने की याचिका दायर की थी लेकिन उनकी यह मांग स्वीकार नहीं हुई। अब उसी दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस तेजस करिया ने अरविंद केजरीवाल से जुड़े एक मामले से अपना नाम वापस ले लिया है। यह मामला एक जनहित याचिका का है जिसमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का आरोप लगाया गया है। जस्टिस तेजस करिया के नाम वापस ले लेने की वजह से इस केस की सुनवाई टल गई है और अब अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
जनहित याचिका दायर करने वाला याचिकाकर्ता का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं ने कोर्ट का वीडियो सार्वजनिक किया जो की अदालत की अवमानना है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई इस याचिका पर आज यानी बुधवार को सुनवाई होनी थी। यह केस दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के लिए लिस्ट किया गया था लेकिन अब तेजस करिया ने अपना नाम वापस ले लिया है।
किसने दायर की है याचिका?
यह याचिका वकील वैभव सिंह ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि कोर्ट की अवमानना करते हुए केजरीवाल और AAP के नेताओं ने वीडियो जारी किया। इस वीडियो में अरविंद केजरीवाल को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने अपनी दलीलें पेश करते देखा गया था। वकील वैभव सिंह का तर्क है कि यह हाई कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है।
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उनका यह भी कहना है कि यह सब एक साजिश के तहत किया गया और जनता की नजर में कोर्ट को छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। वैभव सिंह ने यह याचिका 15 अप्रैल को दायर की थी और इस पर 22 अप्रैल को सुनवाई होनी थी। हालांकि, अब जस्टिस तेजस करिया ने अपना नाम वापस ले लिया है। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने अपना नाम क्यों वापस ले लिया है।
कौन हैं तेजस करिया?
हाई कोर्ट का जज बनने से पहले वह एक प्राइवेट और नामी लॉ फर्म के वकील रहे हैं। वह मेटा के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स की तरफ से केस लड़ चुके हैं। हालांकि, यह माना जा रहा है कि इस याचिका में मेटा, X और गूगल जैसी संस्थाओं को पार्टी बनाए जाने की वजह से ही तेजस करिया ने अपना नाम वापस ले लिया है क्योंकि वह पहले इन कंपनियों के लिए वकील रह चुके हैं।