दिल्ली पुलिस ने नेपाल और कंबोडिया से जुड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसी गिरोह ने दिल्ली के एक बुजुर्ग दंपत्ती से 14.84 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने 2.08 करोड़ रुपये की रकम को फ्रीज करके कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इस ऑपरेशन में गुजरात, ओडिशा और उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद की। साइबर ठगी का यह गिरोह नेपाल और कंबोडिया में बैठे ऑपरेटरों से जुड़ा था।
आरोपियों ने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के रहने वाली 77 साल की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट करके 14.84 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया था। दिसंबर महीने में महिला के पास ठगों ने कॉल किया और उसे बताया कि आपके नाम जारी सिम कार्ड का मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद आरोपियों ने सीबीआई समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बनकर महिला को वीडियो कॉल किए। जाली गिरफ्तारी वारंट और कोर्ट की कॉपी भेजी। बुजुर्ग महिला को पति समेत 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। मामले की जानकारी किसी को भी नहीं देने की धमकी दी।
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जांच के नाम पर पैसा करवाया ट्रांसफर
आरोपियों ने झांसा दिया कि उन्हें अपना पैसा अन्य बैंक में ट्रांसफर करना होगा। मामले की पूरी जांच होगी। सबकुछ सही मिलने पर रकम लौटा दी जाएगी। झांसे में आकर दंपत्ती ने 14 करोड़ से अधिक की रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में ठगी का एहसास होने पर 10 जनवरी को स्पेशल सेल के IFSO पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई।
दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक टीम का गठन किया और जांच में पता लगाया कि यह रकम किन खातों में भेजी गई। कड़ी से कड़ी जोड़कर दिल्ली पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के इशारे पर पैसों को फर्जी खाते में भेजा गया, ताकि किसी भी जांच से बचा जा सके।
कौन-कहां से पकड़ा गया?
- वडोदरा से दिव्यंग पटेल और कृतिक शितोले
- भुवनेश्वर से महावीर शर्मा उर्फ नील
- गुजरात से अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन
- वाराणसी से अरुण कुमार तिवारी और प्रद्युमन तिवारी
- लखनऊ से भूपेंद्र कुमार मिश्रा और आदेश कुमार सिंह
कोई MBA तो कोई बीकॉम तक पढ़ा
दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिव्यंग पटेल बीकॉम पास है और सीए की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुका है। 15 जनवरी को उसे कृतिक शितोले के साथ पकड़ा गया था। शितोले के पास न्यूजीलैंड से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा है। 16 जनवरी को शिवा चैरिटेबल फाउंडेशन नाम से एनजीओ चलाने वाले अरुण कुमार तिवारी को वाराणसी से गिरफ्तार किया गया। वह आयकर विभाग के दफ्तर के बाहर प्राइवेट डेटा-एंट्री ऑपरेटर का काम करता था।
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पुजारी भी ठगी गिरोह में
19 जनवरी को भुवनेश्वर से बीकॉम ग्रेजुएट महावीर शर्मा और अगले दिन वाराणसी से प्रद्युमन तिवारी को पकड़ा गया। प्रद्युमन तिवारी वाराणसी के घाटों पर पूजा पाठ कराता था। एसबीआई सिक्योरिटीज में सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम चुके अंकित मिश्रा को 21 जनवरी को दबोचा गया। अंकित भी बीकॉम तक पढ़ा-लिखा है। आरोपी आदेश कुमार बीए पास है और ट्यूशन पढ़ाता था। एमबीए पास भूपेंद्र मिश्रा प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर चुका है। दोनों को लखनऊ से पकड़ा गया है।