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दिल्ली में मंहगी होगी बिजली! सरकार कहां से लाएगी 30 हजार करोड़ रुपये?

दिल्ली में बिजली के बिल बढ़ने की संभावना अब और ज्यादा हो गई है। DERC ने 30 हजार करोड़ का बकाया चुकाने के लिए APTEL से समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया है।

CM Rekha Gupta

CM रेखा गुप्ता, Photo Credit- PTI

दिल्लीवासियों को अब अपने घरों को रोशन करने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 30 हजार करोड़ का बकाया देने के लिए समय सीमा को बढ़ाने की मांग की थी। APTEL ने यह अपील खारिज करते हुए पहले से तय समय सीमा में बकाया देने के लिए कहा है।अब इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ सकता है। 

 

दिल्ली सरकार को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 30000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाया का भुगतान करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले ही फटकार लगा दी है। इस बकाया के भुगतान के लिए दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को जिम्मेदारी मिली है। पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक निर्देश दिया था जिसमें कहा गया था कि सरकार तीन निजी डिस्कॉम (BRPL, BYPL और TPDDL) को 27200 करोड़ रुपये का भुगतान करे। इसके साथ ही सरकार को कैरिंग कॉस्ट यानी ब्याज का भुगतान करने के लिए भी कहा गया। 

 

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला

पिछले साल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली की बिजली कंपनियों को यह बकाया राशि 7 साल के भीतर वसूल करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ही इस प्रक्रिया में तेजी आई और इसकी जिम्मेदारी दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को दी गई। 

बिजली दरें बढ़ सकती हैं?

डिस्कॉम की आर्थिक स्थिति सुधारने और बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अब दिल्ली में बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब यह कदम जरूरी हो सकता है। अगर समय रहते इसमें सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में बिजली की आपूर्ति पर सीधा असर प़ृड़ सकता है। सरकार को अब बकाया चुकाना ही होगा। 

 

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सरकार का प्लान

सराकर के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वह बिना बिजली की दरों में बढ़ोतरी किए यह बकाया दिया जाए। दिल्ली में डिस्कॉम कंपनी अन्य राज्यों की तरह सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट हैं। ऐसे में सराकर इसका बोझ सीधे खुद नहीं उठा सकती। दिल्ली में फाइनल रिकवरी सीधे बिलों या फिर सरकारी सब्सिडी के जरिए हो सकती है। 

 

कुछ दिन पहले दिल्ली सरकार में बिजली मंत्री आशीष सूद ने मीडिया से बात करते हुए इस विषय पर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि  अभी जो फैसला आया है वह रेगुलेरिटी बॉडी का फैसला है। उन्होंने कहा था कि दिल्ली सरकार प्रतिबद्ध है कि बिजली के बढ़े हुए दाम का असर जनता पर नहीं पड़े। 

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