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पड़ोसी देशों से पैसा जुटाने की तैयारी में है सरकार, FDI नियमों में किए बदलाव

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बॉर्डर से लगे देशों के साथ एफडीआई नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। अब इससे स्टार्टअप्स फंडिंग के लिए ज्यादा पैसा आने की उम्मीद है।

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नरेंद्र मोदी । Photo Credit: PTI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत से सटे सीमा वाले देशों से निवेश के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी गई है। यह बदलाव विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नीति में किया गया है, जिससे स्टार्टअप्स में वैश्विक फंड से ज्यादा पैसा आने की उम्मीद है और कारोबार करना आसान बनेगा।

 

सरकार के प्रेस नोट के अनुसार, ये बदलाव दो बड़े फैसलों पर आधारित हैं। पहला बेनिफिशियल ओनर यानी कि लाभ पाने वाले मालिक की परिभाषा में बदलाव किया गया है। अब पड़ोसी देशों (जिन्हें लैंड बॉर्डर कंट्रीज कहते हैं, जैसे चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि) से निवेशक अगर किसी भारतीय कंपनी में 10% तक नॉन-कट्रोलिंग (non-controlling) हिस्सेदारी रखते हैं तो वे ऑटोमैटिक रूट से निवेश कर सकेंगे।

 

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कोविड के समय में बने थे नियम

पहले कोविड-19 के समय में बनाए गए नियम के तहत ऐसे सभी निवेश के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी थी। अब 10% तक की ऐसी हिस्सेदारी के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी लेकिन सेक्टर के नियमों का पालन करना होगा।

60 दिनों के अंदर फैसला

दूसरा 60 दिनों की समय सीमा। कुछ खास सेक्टर्स में ऐसे निवेश प्रस्तावों पर फैसला 60 दिनों के अंदर ले लिया जाएगा। ये सेक्टर हैं - कैपिटल गुड्स का मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन और इंगोट-वेफर। इन मामलों में कंपनी का ज्यादातर हिस्सा और नियंत्रण हमेशा भारतीय नागरिकों या भारतीय नियंत्रित कंपनियों के पास रहेगा।

क्यों किया गया यह बदलाव?

सरकार का कहना है कि ये नए नियम निवेशकों को स्पष्टता देंगे और भारत में कारोबार करना आसान बनाएंगे। इससे ज्यादा FDI आएगा, नई तकनीक मिलेंगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, कंपनियां बड़ी होंगी और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव मजबूत होगा। यह भारत को निवेश और मैन्युफैक्चरिंग का पसंदीदा देश बनाने में मदद करेगा। ज्यादा FDI से घरेलू पूंजी बढ़ेगी, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पूरे होंगे और अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी।

 

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यह फैसला 2020 के प्रेस नोट 3 में संशोधन है, जो महामारी के दौरान अवसरवादी अधिग्रहण रोकने के लिए लाया गया था। अब ये बदलाव स्टार्टअप्स, डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देंगे।

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