महाराष्ट्र की सियासत में जब भी 'दादा' शब्द का जिक्र होता है, तो सबसे पहला चेहरा अजीत पवार का सामने आता है। शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति के मैदान में उतरे अजीत पवार ने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली। उनके काम करने का अंदाज ऐसा रहा कि प्रशासन के बड़े-बड़े अफसर भी उनके सामने सजग रहते थे। एक छोटे से कस्बे से निकलकर प्रदेश की सत्ता के केंद्र तक पहुंचने की उनकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।
अजीत पवार के करियर में कई ऐसे मोड़ आए जब लगा कि उनका राजनीतिक सफर थम जाएगा लेकिन हर बार उन्होंने अपनी रणनीति से सबको चौंका दिया। चाहे वह सुबह-सुबह राजभवन में शपथ लेना हो या अपनी अलग पार्टी बनाकर सत्ता में हिस्सेदारी पाना, अजीत पवार ने साबित किया है कि महाराष्ट्र की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूमती थी। आइए जानते हैं उनके करियर के उन पड़ावों को जिन्होंने उन्हें 'पावरफुल' नेता बनाया।
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करियर की पूरी टाइमलाइन
- 1982 में शुरुआत: अजीत पवार की राजनीति में एंट्री एक शुगर फैक्ट्री के चेयरमैन के रूप में हुई। यहीं से उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ना सीखा।
- 1991 में संसद में एंट्री: उन्होंने पहली बार बारामती लोकसभा सीट से चुनाव जीता और सांसद बने। हालांकि, कुछ ही समय बाद उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए यह सीट छोड़ दी और राज्य की राजनीति में वापस आ गए।
- 1991-1999 में विधायक और मंत्री: वह पहली बार विधायक चुने गए और सुधाकरराव नाइक की सरकार में कृषि और बागवानी मंत्री बने। इसके बाद वह लगातार कई बार विधायक रहे और अलग-अलग मंत्रालयों की कमान संभाली।
- 2010 में डिप्टी सीएम का पहला दौर: पहली बार अजीत पवार को महाराष्ट्र का डिप्टी सीएम बनने का मौका मिला। इस दौरान सिंचाई और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर उनकी मजबूत पकड़ रही।
- नवंबर 2010 से नवंबर 2011: इस समय पृथ्वीराज चव्हाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस-एनसीपी की साझा सरकार बनी और इसी सरकार में अजित पवार पहली बार डिप्टी सीएम बने।
- 2011 से 2014: पृथ्वीराज चव्हाण दोबारा मुख्यमंत्री बने। इस पूरे कार्यकाल में अजित पवार डिप्टी सीएम रहे। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक फिर से यह पद नहीं मिला।
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2019 में सियासी भूचाल: यह साल उनके करियर का सबसे चर्चित साल रहा। सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस के साथ शपथ लेकर उन्होंने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, हालांकि यह सरकार सिर्फ 80 घंटे ही चली। बाद में वह महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में वापस लौट आए।
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दिसंबर 2019 से जून 2022: उद्धव ठाकरे ने एनडीए से अलग होकर महा विकास अघाड़ी बनाई। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की इस सरकार में अजित पवार डिप्टी सीएम रहे।
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2023 में बगावत और नई राह: अजीत पवार ने NCP में एक बड़ी बगावत की और अपने गुट के विधायकों के साथ एक बार फिर NDA सरकार में शामिल होकर डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाली। एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल होकर अजित पवार लगातार पांचवीं बार उपमुख्यमंत्री बने।
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2024-2026 में मौजूदा स्थिति: अलग NCP (अजीत गुट) के अध्यक्ष और महाराष्ट्र की महायुति सरकार में एक मुख्य भूमिका के रूप में काम कर रहे थे। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में, एकनाथ शिंदे के साथ, अजित पवार छठी बार उपमुख्यमंत्री बने। फिलहाल यह पद खाली है।