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हरदीप पुरी ने दिया राहुल को जवाब, बता दिया कि कैसे आया एपस्टीन फाइल्स में नाम?

हरदीप पुरी ने इस बात का जवाब राहुल गांधी को दिया कि आखिर उनका नाम कैसे एपस्टीन फाइल्स में आया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था।

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हरदीप पुरी । Photo Credit: PTI

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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों का करारा जवाब दिया है। राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने भाषण में जेफरी एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए हरदीप पुरी और कारोबारी अनिल अंबानी के नाम लिए थे।

 

हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि उनका एपस्टीन से संपर्क बहुत कम था और वह सिर्फ कुछ मौकों पर एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिले थे। उन्होंने बताया, 'मैंने एपस्टीन से सिर्फ 3-4 बार मुलाकात की, वह भी इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) के एक कमीशन के तहत। हमारा सिर्फ एक ईमेल हुआ था। इन मुलाकातों का एपस्टीन के खिलाफ लगे आरोपों से कोई लेना-देना नहीं था।'

 

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कैसे था संपर्क?

पुरी ने कहा कि उस समय उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था। उन्होंने हॉफमैन को भारत आने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा,  'हम 'मेक इन इंडिया' और डिजिटल इंडिया जैसे विषयों पर बात करते थे। तीन मिलियन ईमेल्स में मेरे नाम का सिर्फ 3-4 बार जिक्र है।'

कहा- नहीं दिलचस्पी

पुरी ने आगे कहा, 'मुझे एपस्टीन की गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उनके लिए मैं 'सही व्यक्ति' नहीं था।' उन्होंने बताया कि एपस्टीन ने उन्हें 'दो चेहरे वाला' (two-faced) कहा था और राहुल गांधी को सलाह दी कि वे वह ईमेल पढ़ें।

राहुल गांधी ने संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी एपस्टीन फाइल्स में पुरी और अनिल अंबानी के नाम का हवाला दिया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि अनिल अंबानी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

पीएम मोदी पर भी लगे थे आरोप

इससे पहले, 31 जनवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 की इजराइल यात्रा के जिक्र को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि ये एक दोषी अपराधी की 'बकवास सोच' है और इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

 

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जारी हुए लाखों पन्नों के दस्तावेज

बता दें कि पिछले महीने अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से ज्यादा वीडियो और 1.8 लाख तस्वीरें जारी की हैं। ये दस्तावेज एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी किए गए हैं। इस कानून से सरकार को एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए मजबूर किया गया है।

 

एपस्टीन पर युवा लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के आरोप थे। वह 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मर गया था, जिसे सुसाइड बताया गया।


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