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पुरुष हो या महिला सबको चाहिए बेटा, सिर्फ 3.4% महिलाओं ने जताई बेटी की चाहत

हरियाणा के एक कपल का वीडियो सामने आया है, जिनके बेटे की चाहत में 11 बच्चे पैदा हो गए। कपल की 10 बेटियां हैं और 11वां बच्चा लड़का है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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बेटे की चाहत क्या न करवाए? हरियाणा में बेटे की चाहत में एक कपल के 11 बच्चे हो गए। मामला जींद जिले का है। बेटे की चाह में 19 साल में 11 बच्चे पैदा कर दिए। कपल की पहले 10 बेटियां थीं और 11वां बच्चा लड़का हुआ। हैरान करने वाली बात तो यह है कि जब बच्चों के पिता से बेटियों के नाम पूछे गए तो उन्हें अपनी ही बेटियों के नाम तक याद नहीं थे।

 

सोशल मीडिया पर इस कपल का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। बेटे की चाह में 11 बच्चे पैदा करने पर इनकी ट्रोलिंग भी हो रही है। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि सरकार को इनसे सभी बच्चे ले लेने चाहिए, क्योंकि ये लोग इन्हें पाल नहीं पाएंगे।

 

खैर, बेटे की चाहत में ज्यादा बच्चे पैदा कर देना कोई नई बात नहीं है। भारत में कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। यहां तो कपल ने 11 बच्चे ही किए। आज से लगभग 10 साल पहले गुजरात के दाहोद में एक मामले सामने आया था, जहां कपल ने बेटे की चाह 17 बच्चे पैदा कर दिए थे। कपल की 16 बेटियां और 1 बेटा था। इसके बाद कपल को एक और बेटा चाहिए था।

 

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कितनी लड़कियां पैदा हो रहीं?

सदियों से बेटियों क तुलना में बेटों को ही तरजीह मिलती रही है। बात चाहे गांव-देहात की हो या फिर शहर की, हर परिवार बेटा जरूर चाहता है।

 

यही कारण है कि भारत में अब भी 1,000 लड़कों पर 914 लड़कियां ही पैदा हो रहीं हैं। इस मामले में सबसे ज्यादा खराब हालत दिल्ली की है। दिल्ली में 1,000 लड़कों पर 864 लड़कियां हैं। हरियाणा दूसरे नंबर पर है, जहां 1,000 लड़कों पर 883 लड़कियां पैदा होती हैं। ये आंकड़े स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगस्त 2025 में राज्यसभा में रखे थे।

 

आजाद भारत में अब जाकर हालात थोड़े सुधरने शुरू हो गए हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFH-5) की रिपोर्ट बताती है कि अब भारत में 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाएं हैं। पहली बार है जब महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हुई है।

 

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बेटी नहीं, बेटा चाहिए

बेटी की चाहत भारतीय परिवारों में घर-घर की कहानी है। ताजा सर्वे में भी सामने आया है कि बेटे की चाहत भारत में अब भी बरकरार है।

 

NFHS-5 का सर्वे बताता है कि अब भी 81.3% महिलाएं कम से कम एक बेटा चाहती हैं। वहीं, 78.9% महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें कम से कम एक बेटी चाहिए। महिलाओं की तुलना में 81% पुरुष कम से कम एक बेटा और 78% पुरुष कम से कम एक बेटी चाहते हैं। ये दिखाता है कि परिवारों में अब भी बेटों को ज्यादा तरजीह मिल रही है।

 

सर्वे के नतीजों से यह भी पता चलता है कि 16% पुरुष और 15% महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें बेटा पैदा हो। हैरान करने वाली बात यह है कि सिर्फ 3.4% महिलाएं ऐसा चाहती हैं कि उन्हें बेटी हो। जबकि, बेटी की ख्वाहिश रखने वाले पुरुषों का आंकड़ा 4.1% है।

 

ज्यादातर राज्य ऐसे हैं, जहां कि महिलाएं खुद ही बेटी की बजाय बेटा चाहती हैं। बिहार में 31.3% महिलाएं और 22% पुरुष बेटे को तरजीह देते हैं।

 

इतना ही नहीं, जिन महिलाओं का एक भी बेटा नहीं है, उनमें से 65% ही अब कोई और बच्चा नहीं चाहतीं। जबकि, जिनके तीन बेटे हैं, वैसी 91% महिलाओं को अब कोई और बच्चा नहीं चाहिए। यह दिखाता है कि जिनका कोई बेटा नहीं है, वह अब भी बेटे की आस में और बच्चे पैदा करना चाहते हैं।

 

सर्वे बताता है कि जिन महिलाओं का कोई बेटा नहीं है और तीन बेटियां हैं, उनमें अल्ट्रासाउंड करवाने की संभावना ज्यादा है। जिन औरतों ने अल्ट्रासाउंड करवाया, उनकी प्रेग्नेंसी में बेटा पैदा होने की ज्यादा संभावना होती है। अल्ट्रासाउंड करवाने वाली महिलाओं के मामले में 51% में बेटा और 37% में बेटी पैदा हुई। ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत में बेटे की चाहत मौजूद है।

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