IFR 2026: 7वीं रैंक, चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी, नौसेना की चुनौतियां क्या हैं?
भारत की समुद्री सीमा में सबसे बड़ी चुनौती चीन है। हिंद महासागर में चीन अपने जासूसी जहाजों से भारतीय क्षेत्रों की टोह लेने की कोशिश करता रहता है। भारत को उन्नत नौसेना की जरूरत है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत। Photo Credit: PTI
भारतीय नौसेना, विशाखापत्तनम में 15 से 25 फरवरी 2026 तक इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और एक्सरसाइज MILAN का आयोजन कर रही है। अमेरिका, रूस और जर्मनी जैसी महाशक्तियों के युद्धक विमान बंगाल की खाड़ी में जुटे हैं। भारतीय नौसेना के इस आयोजन में 72 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। कुल 60 से ज्यादा युद्धपोत और कई नौसैनिक हवाई जहाज यहां मंडराने वाले हैं।
पहली बार जर्मनी, फिलीपींस और UAE की नौसेनाएं भी आ रही हैं। अमेरिका समंदर का बेताज बादशाह कहा जाता है। चीन के टोही जहाजों ने भारत के लिए हर क्षेत्र में मुश्किलें पैदा कीं हैं। रूसी जंगी जहाजें के खतरे से भी दुनिया वाकिफ है। जर्मनी बेहतर शिप डिजाइनिंग के लिए दुनिया में मशहूर है।
ब्रिटेन, कॉलोनियल रूल के जमाने से ही समुद्र की एक बड़ी शक्ति रही है। समंदर के जरिए, पूरी दुनिया में ब्रितानिया हुकूमत का झंडा अंग्रेजों ने अपने नौसेना के दम पर लहराया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि भारत की नौसेना कितनी मजबूत है, क्या जरूरतें हैं, भारत को क्या चाहिए, किन चुनौतियों से हम जूझ रहे हैं-
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कितनी मजबूत है भारतीय नौसेना?
द वर्ल्ड डायरेक्टी ऑफ मॉर्डन मिलिट्री वॉरशिप (WDMMW) ने अपनी रिपोर्ट 'ग्लोबल नेवल पॉवर रैंकिंग 2026' की रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय सेना, समुद्री ताकत में 7वें पायदान पर हैं। WDMMW हर साल दुनिया की नौसेनाओं की रैंकिंग जारी करता है। यह रैंकिंग एक खास फॉर्मूले से बनती है, जिसे ट्रू वैल्यू रेटिंग (TvR) कहते हैं। इस संस्था ने सबसे ज्यादा रेटिंग अमेरिकी नौसेना को दी है।
- अमेरिका, TvR: 323.9, सैन्य क्षमता- 332 युद्धपोत
- पीपुल्स रिबरेशन आर्मी नेवी, TvR: 319.8, सैन्य क्षमता- 405 युद्धपोत
- रशियन नेवी, TvR: 242.3, सैन्य क्षमता-283 युद्धपोत
- इंडोनेशिया नेवी, TvR: 137.3, सैन्य क्षमता- 245 युद्धपोत
- रिपब्लिक ऑप कोरिया नेवी, Tvr: 122.9, सैन्य क्षमता- 245 युद्धपोत
- जापान मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स, TvR: 121.3, सैन्य क्षमता- 147 युद्धपोत
- भारतीय नौसेना, TvR: 100.5, सैन्य क्षमता- 100 युद्धपोत
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नौसेना के लिए सरकार क्या कर रही है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026-27 के लिए पेश बजट में रक्षा मंत्रालय को अब तक का सबसे बड़ा बजट दिया है। रक्षा विभाग को कुल कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह पिछले साल के बजट अनुमान 6.81 लाख करोड़ रुपये से 15.19 फीसीद ज्यादा है। साल 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तब रक्षा बजट करीब 2.29 लाख करोड़ रुपये था। अब यह तीन गुना से भी ज्यादा हो चुका है।
नौसेना के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 25,023.63 करोड़ रुपये दिए गए हैं। साल 2025 में यह बजट 24,390.95 करोड़ था। सरकार ने नौसेना की ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि यह बजट सेना को और मजबूत, आधुनिक और तैयार रखेगा।
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भारतीय नौसेना की चुनौतियां क्या हैं?
- चीन के टोही जहाज: भारतीय नौसेना, अब अब 'कॉस्ट गार्ड' की भूमिका से इतर ब्लू वाटर नेवी की तरफ बढ़ रहा है, जिसकी समुद्र में दमदार मौजूदगी हो। वजह यह है कि भारत के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से सामना करना है। हिंद महासागर में चीन आए दिन टोही जहाजों को नियुक्त करता है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ती रही है।
- स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स: चीन का 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' भारत के लिए चुनौती है। चीन, जिबूती, ग्वादर और हंबनटोटा जैसे बंदरगाहों का रणनीतिक इस्तेमाल करता है। भारत विरोध करता है, दबाव बनाता है लेकिन चीन बार-बार अपने टोही विमानों को इन क्षेत्रों में उतारता है। चीन के पास दुनिया में सबसे ज्यादा युद्धक पोत हैं, अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर चीन ही है।
- पुरानी पनडुब्बियां: रक्षा मंत्रालय और नौसेना के अधिकारी इस बात से वाकिफ हैं कि भारत में पनडुब्बियों की कमी है। ज्यादातर पारंपरिक पनडुब्बियां पुरानी हो रही हैं। सिंधुकुश रेंज की पनडुब्बियों की तरह नए सिस्टम की मांग उठती रही है। प्रोजेक्ट-75 (I) जैसी परियोजनाओं में भारत पिछड़ रहा है।
- विदेश पर निर्भरता: नौसेना की 'अंडरवाटर' क्षमता चीन के मुकाबले कमतर है। चीन के पास लगभग 60 से 70 पनडुब्बियां हैं, जबकि भारत के पास लगभग 18-20 ही हैं। रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा सैलरी और पेंशन में जाता है। नए जहाजों और एडवांड उपकरणों पर कम खर्च हो पाता है। भारत अभी तकनीकी रूप से सक्षम उपकरणों और जेट इंजनों के लिए विदेशी ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEMs) पर निर्भर है। यह बहुत खर्चीला है।
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फ्लीट रिव्यू क्यों हो रहा है?
यह एक तरह का बड़ा समुद्री परेड है। राष्ट्रपति, नौसेना के अधिकारी इस आयोजन में शामिल होते है। मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ भारतीय नौसेना अभ्यास करती है, समंदर में देश, अपनी ताकत और दोस्ती दिखाते हैं। फ्लीट रिव्यू में ही MILAN 2026 का आयोजन हो रहा है। 19 फरवरी से कई देशों की नौसेनाएं साथ मिलकर अभ्यास करेंगी।
क्या होने वाला है?
एंटी सबमरीन वॉर, एयर डिफेंस, सी विजिलेंस और सर्च-एंड-रिस्क्यू जैसे काम सिखाए और सीखे जाएंगे। इससे अलग-अलग देशों के बीच बेहतर समझ और सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कौन से देश फ्लीट रिव्यू से बाहर हैं?
चीन और तुर्की को इस बार न्योता नहीं दिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने दावा किया है कि तुर्की और चीन ने पाकिस्तान की मदद की है। समुद्र में भारत के लिए चीन और पाकिस्तान बड़ी चुनौती भी हैं।
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विशाखापत्तनम में और क्या खास होने वाला है?
विशाखापत्तनम शहर में इंटरनेशनल सिटी परेड होगी, जहां नौसेना के जवान सड़कों पर मार्च करेंगे। एक बड़ा सेमिनार भी होगा जहां समुद्री सुरक्षा पर बात होगी। यह आयोजन भारत के लिए हिंद-प्रशांत महासागर में इलाके में एक मजबूत और भरोसेमंद समुद्री साथी के रूप में दिखाने का बड़ा मौका है। यहां अब तकनीक, ड्रोन और AI का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण भारत का अपना एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत है। यह समंदर में भारत के बढ़ते दबदबे को और दिखाने वाला है। 18 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री इस फ्लीट रिव्यू को देखेंगे।
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