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भारत में घुसते ही गिर जाएंगे तुर्की-पाकिस्तान के ड्रोन, क्या है इंद्रजाल सिस्टम?

चीन, तुर्की और पाकिस्तान के ड्रोन की अब खैर नहीं है। भारत की एक कंपनी ने इंद्रजाल सिस्टम विकसित किया है। इससे पार पाना दुश्मन के ड्रोन के बस की बात नहीं है। कई खुबियों से लैस यह भारत का नया चलता फिरता एयर डिफेंस सिस्टम क्या है? आइये जानते हैं।

Indrajaal Ranger

भारत के इंद्रजाल से कैसे बचेगा पाकिस्तान। (Photo Credit: indrajaal.in)

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भारत को अपना पहला एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन (ADPV) मिल गया है। तेलंगाना की कंपनी इंद्रजाल ड्रोन डिफेंस ने देश के सामने अपना खास वाहन पेश किया। यह वाहन कई खुफियों से लैस है। सीमावर्ती क्षेत्र, बड़े काफिले और शहरों में हर तरह के ड्रोनों को नष्ट करने की ताकत रखता है। एआई से लैस इंद्रजाल वाहन दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, उसे ट्रैक करने और अपने तकनीक से निष्क्रिय कर सकता है।

 

देश में अभी तक जो एंटी-ड्रोन सिस्टम हैं, वह एक ही जगह पर स्थापित होते हैं। एक से दूसरी जगह ले जाना थोड़ा मुश्किल काम है। मगर इंद्रजाल इस मामले में बिल्कुल अलग है। यह पूरा सिस्टम एक वाहन पर स्थापित है। कभी और कहीं भी ले जाया जा सकता है। उसकी यही खूबी, उसे बाकी एंटी-ड्रोन सिस्टम से अलग बनाता है। यह सिस्टम एआई की मदद से अपने टारगेट की पहचान करता है और तुरंत ही उसे बेअसर कर देता है।

 

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कौन-कौन खूबियों से लैस इंद्रजाल?

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक इंद्रजाल रेंजर एक एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन है। इसे देश की सीमा और शहरी इलाकों में खतरनाक ड्रोन को रोकने की खातिर विकसित किया गया। यह वाहन इंटीग्रेटेड साइबर टेकओवर यूनिट, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) स्पूफिंग, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) जैमिंग और स्प्रिंग-लोडेड किल स्विच से लैस है। इंद्रजाल रेंजर चार किमी के क्षेत्र में खतरनाक ड्रोन को खुद ही तबाह कर देता है।

कहां-कहां हो सकता इस्तेमाल?

कंपनी का कहना है कि इंद्रजाल रेंजर एक चलता फिरता ऑटोनॉमस एयरस्पेस कंट्रोल है। यह अपने क्षेत्र में किसी भी खतरनाक ड्रोन को पर भी नहीं मारने देता है। इंद्रजाल रेंजर का इस्तेमाल सीमावर्ती चौकियों, काफिले के रास्ते और उन जगह पर किया जा सकता है, जहां फिक्स्ड डिफेंस सिस्टम नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक स्थान से दूसरे स्थान आसानी से ले जाया जा सकता है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

इंद्रजाल रेंजर की साइबर टेकओवर यूनिट, जीएनएसएस स्पूफिंग, जैमिंग और काइनेटिक किल मैकेनिज्म एआई-संचालित प्रोसेसिंग कोर के जरिये एक-दूसरे से मिलजुल के काम करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया स्काईओएस से संचालति होती है। स्काईओएस इंद्रजाल रेंजर वाहन में ब्रेन की तरह काम करता है। यह एक केंद्रीय कमांड लेयर है। जिसका काम खतरों का पता लगाना और उन पर कैसे हमला करने है, इसका निर्णय लेना है।

 

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इंद्रजाल रेंजर दो किमी क्षेत्र तक के ड्रोन को हार्ड किल से निपटाता है। मसलन, अगर दुश्मन का कोई ड्रोन उसके दो किमी के क्षेत्र में आ गया तो यह सिस्टम खुद पर लगे जोम्बी इंटरसेप्टर ड्रोन के माध्यम से दुश्मन के ड्रोन पर हमला करके उन्हें नष्ट करता है। साइबर ओवरटेक तकनीक से इंद्रजाल दुश्मन के ड्रोन को दूर से ही हाईजैक कर लेता है। जीएनएसएस स्पूफर और जैमर के माध्यम से एक निश्चित दायरे में ड्रोन नेविगेशन सिग्नल से ड्रोन को रोका जाता है। दुश्मन के ड्रोन पर कब और कौन सा हमला करना है, यह सब स्काईओएस तय करता है। 

इंद्रजाल रेंजर की क्षमता

  • दो किमी तक हार्ड किल जोन
  • तीन किमी तक सॉफ्ट किल जोन
  • 4 किमी तक सॉफ्ट कैप्चर जोन
  • 10 किमी तक ड्रोन डिटेक्शन और ट्रैक

किस कंपनी ने इंद्रजाल को विकसित किया?

कंपनी का कहना है कि इंद्रजाल रेंजर को युद्ध में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। यह ड्रोन को मारने और घुसपैठ को रोकने के अलावा रणनीतिक चौकियों की रक्षा करने में सक्षम है। सीमा पर ड्रोन से तस्करी पर लगाम लगाने के काम आएगा। इंद्रजाल रेंजर ड्रोन को मारने में कोई भेदभाव नहीं करता है। दुश्मन का कोई भी ड्रोन हो, उसका काल इंद्रजाल। यह सेल्फ ड्रोन, रेसिंग ड्रोन और स्वार्म ड्रोन को तबाह करने की ताकत रखता है।

 

इंद्रजाल को साल 2020 में ग्रीन रोबोटिक्स ने विकसित किया। कंपनी के पास ऑटोनॉमस सिस्टम में 15 साल के आरएंडडी के अलावा रडार और एयरस्पेस मैनेजमेंट में 3 दशकों की विशेषज्ञता वाली एक टीम है। कंपनी का मुख्यालय तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में है।

 

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