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मणिपुर में NH02 खोलने पर सहमति, केंद्र ने कुकी-जो से क्या समझौता किया?

उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर जा सकते हैं। उससे पहले केंद्र सरकार ने कुकी समूह के साथ एक बड़ा समझौता किया है। आइये जानते हैं इसके बारे में...

Manipur News.

फाइल फोटो। (Photo Credit: PTI)

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मणिपुर में तनाव के बीच केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुकी-जो काउंसिल (KZC) के साथ पिछले कुछ दिनों में कई बैठक की। इसके बाद कुकी-जो काउंसिल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-02 को खोलने पर हामी भर दी है। अब मणिपुर के बाकी इलाकों में आवश्यक सामान की आवाजाही आसान होगी। गुरुवार को केद्रीय गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी। काउंसिल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर शांति कायम रखने में वह सुरक्षा बलों को सहयोग देंगे।

 

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार और कुकी राष्ट्रीय संगठन व यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट के बीच हुई अहम बैठक में त्रिपक्षीय संचालन निलंबन (SOO) समझौते पर सहमति बनी। इसके तहत समझौते की शर्तें हस्ताक्षर की तारीख से एक वर्ष तक लागू रहेंगी।

 

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तीनों पक्ष मणिपुर में स्थायी शांति और स्थिरता लाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा निर्धारित शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को सीआरपीएफ/बीएसएफ शिविरों में भेजने और उग्रवादी कैडरों के फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान पर सहमति जताई है।


गृह मंत्रालय ने बताया कि एक अहम फैसले में कुकी-जो परिषद ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-02 को यात्रियों और आवश्यक सामान की मुक्त आवाजाही की खातिर खोलने का फैसला किया है। यह निर्णय पिछले कुछ दिनों में नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और केजेडसी के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई बैठकों के बाद लिया गया है।


परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर शांति कायम रखने में सहयोग देने की प्रतिबद्धता भी जताई है। समझौते के नियमों को लागू करने की निगरानी संयुक्त निगरानी समूह करेगा। अगर भविष्य में उल्लंघन हुआ तो सख्ती से निपटने की बात कही गई है।

 

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किन-किन मुद्दों पर बनी सहमति?

  • मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने पर जोर।
  • मणिपुर में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए बातचीत से समाधान की आवश्यकता।
  • केएनओ और यूपीएफ ने इन पर भी सहमति व्यक्त की है।
  • संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से दूर सात शिविरों को स्थानांतरित करना।
  • निर्दिष्ट शिविरों की संख्या कम करना।
  • हथियारों को निकटतम सीआरपीएफ/बीएसएफ शिविरों में पहुंचाना।
  • सुरक्षा बल कैडर का कड़ा फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। ताकि विदेशी नागरिक को सूची से हटाया जा सके।

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