भारत में कंज्यूमर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां मध्य-पूर्व के चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल का सामना कर रही हैं। कंपनियां अब रोजाना लागत पर नजर रख रही हैं, कीमतों की समीक्षा बार-बार कर रही हैं और लंबी अवधि की योजना की बजाय छोटी अवधि के फैसले ले रही हैं।
कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि अचानक बढ़ी महंगाई से कारोबार संभालना मुश्किल हो गया है। साथ ही चिंता है कि महंगाई से कीमतें बढ़ने पर ग्राहकों की मांग प्रभावित हो सकती है। यह उस समय हो रहा है जब सरकार ने पिछले सितंबर में कई उत्पादों पर जीएसटी कम करने के बाद खपत में सुधार शुरू हो गया था।
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कच्चे माल की कीमत में तेज बढ़ोत्तरी
हैवेल्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल राय गुप्ता ने कहा कि कंपनी सतर्क रहते हुए हर महीने स्थिति की समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, 'हाल के दिनों में मैंने कीमतों में इतनी तेजी नहीं देखी। आमतौर पर महंगाई होती है लेकिन न ही वह इतनी तेजी से फैलती है और न ही वह सभी श्रेणियों के प्रोडक्ट में दिखती है। अगर कीमतों में बहुत तेज बढ़ोतरी हुई तो ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है।'
बजाज कंज्यूमर केयर के प्रबंध निदेशक नवीन पांडेय ने बताया कि कंपनी कच्चे माल की लागत को बहुत करीबी से ट्रैक कर रही है और लगभग रोजाना फैसले ले रही है। कंपनी के हालिया आय कॉन्फ्रेंस कॉल में उन्होंने कहा कि पूरे कारोबार में लागत 20% से 60% तक बढ़ गई है।
पैकेजिंग सामग्री की कीमत भी बढ़ी
उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण लाइट लिक्विड पैराफिन और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में 'बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव' आ गया है। साथ ही सरसों और कोपरा की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं घटीं और युद्ध से पहले के स्तर पर बनी हुई हैं। कंपनी अपने ऑपरेशन में लागत कम करने का प्रयास कर रही है।
उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि युद्ध से कमोडिटी की कीमतें, कच्चे तेल से जुड़े उत्पाद, फ्रेट (माल ढुलाई) की लागत बढ़ गई है। रुपए के कमजोर होने से आयात भी महंगा हो गया है। संघर्ष विराम के बाद भी कीमतें नहीं घटीं और अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या संघर्ष फिर शुरू हो सकता है।
कई कंपनियों ने बढ़ाई कीमत
पिछले एक महीने में कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी हैं। इसमें एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, साबुन, डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, कपड़े, पेंट, जूते आदि शामिल हैं। कुछ कंपनियों ने पैक का साइज भी छोटा कर दिया है ताकि लागत संभाल सकें। इस महीने के अंत तक और कीमतें बढ़ने की उम्मीद है।
पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने कहा कि कच्चे माल पर दबाव बहुत ज्यादा है और अनिश्चितता 'परेशान कर रही है'।
खुदरा विक्रेता भी सावधानी भरे खर्च देख रहे हैं। ट्रेंट लिमिटेड (जो वेस्टसाइड और जुडियो स्टोर्स चलाती है) ने इन्वेस्टर्स को दिए गए प्रेजेंटेशन में कहा कि जनवरी-मार्च तिमाही की शुरुआत में मांग स्थिर थी लेकिन अब स्थिति उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित कर रही है।
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लोग भी सावधानी से खर्च कर रहे
कंपनी ने कहा, 'उपभोक्ता सावधानी से खर्च कर रहे हैं, जिससे डिस्क्रिशनरी (ऐच्छिक) खर्च में कमी आ रही है। मैक्रो अनिश्चितताओं और रहन-सहन की बढ़ती लागत के कारण ऐसा हो रहा है। संरचनात्मक रूप से मांग और बाजार के अवसर मजबूत हैं। लेकिन मध्य-पूर्व में बाधाओं की अवधि और तीव्रता, साथ ही सप्लाई चेन, कमोडिटी कीमतों और सामान्य महंगाई पर इसके दूसरे प्रभाव से निकट भविष्य में मांग प्रभावित हो सकती है।'
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस के एग्जीक्यूटिव डिप्टी चेयरमैन अंगशु मल्लिक ने कहा कि कंपनी ने पहले ही खाने के तेल की कीमतें 7-10 रुपये प्रति किलो बढ़ा दी हैं ताकि बढ़ी हुई फ्रेट लागत पास की जा सके। उन्होंने कहा, 'हम स्टेपल्स (आवश्यक) कंपनी हैं, इसलिए कीमतें तुरंत बढ़ा या घटा देते हैं। चूंकि हम बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं, इसलिए वॉल्यूम (मात्रा) पर असर आमतौर पर कम होता है।'
दो महीने से संकट जारी
इस बीच, मध्य पूर्व का संघर्ष दो महीने के करीब पहुंच रहा है। यह 28 फरवरी को शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए। जवाब में तेहरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे दुनिया के 20% ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई।
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यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है क्योंकि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। कंपनियां लागत कम करने और कीमतें सावधानी से बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है। लंबे समय में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है लेकिन निकट भविष्य में सतर्क रहना जरूरी है।