logo

मूड

ट्रेंडिंग:

न टायलेट है, न कुर्सी, हजारों स्कूलों में 1 टीचर, कैसे पढ़ेगा-बढ़ेगा इंडिया?

उत्तर प्रदेश के कई प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जहां फर्श है, टाइल्स लगे हैं लेकिन क्लासरूम में कुर्सी नहीं है, बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं।

Primary School

गुरदासपुर का एक प्राइमरी स्कूल। तस्वीर 2025 की है। Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

भारत में शिक्षा विभाग का नारा है, सब पढ़ें, सब बढ़ें लेकिन देश के हजारों सरकारी स्कूल अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। 1 लाख 4 हजार 125 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिनमें से 89 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में हैं। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। 

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 98,592 स्कूलों में लड़कियों के इस्तेमाल लायक शौचालय नहीं हैं, जबकि 61540 स्कूलों में कोई भी इस्तेमाल लायक शौचालय नहीं है। 
1,19,000 हजार स्कूल अभी भी बिना बिजली के चल रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: जितनी कमाई नहीं, उससे ज्यादा है प्राइवेट स्कूलों की फीस, कैसे पढ़ेंगे बच्चे?

14 हजार से ज्यादा स्कूलों में पानी तक नहीं 

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 14,505 स्कूलों में पानी की सुविधा नहीं है और करीब 60 हजार स्कूलों में हैंडवाश की व्यवस्था भी नहीं है। माध्यमिक स्कूलों में सिर्फ 51.7 प्रतिशत स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशाला है। शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या है। 

शिक्षकों के हजारों पद रिक्त, कैसे पढ़ेगा इंडिया?

बिहार में सबसे ज्यादा 2,08,784 प्राथमिक शिक्षक पद खाली हैं। झारखंड और मध्य प्रदेश में भी हजारों पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों की पढ़ाई-लिखाई की स्थिति भी कमजोर है। रिपोर्ट कहती है कि गणित में सिर्फ 2 प्रतिशत शिक्षक 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला सकते हैं। औसत स्कोर मात्र 46 प्रतिशत है। 

7 हजार से ज्यादा स्कूलों में छात्र ही नहीं हैं 

शिक्षक अपने 14 प्रतिशत काम के दिन गैर-शैक्षणिक कामों जैसे चुनाव ड्यूटी और सर्वे में खर्च कर देते हैं। छात्रों की संख्या को लेकर भी चिंता जताई गई है। देशभर में 7,993 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नहीं है। पश्चिम बंगाल में 3,812 स्कूल ऐसे हैं और तेलंगाना में 2,245 स्कूल, बिना छात्रों के हैं।

यह भी पढ़ें: कहीं टाइम बदला तो कहीं बंद हो गए स्कूल, देशभर में कहर ढा रही गर्मी

देश में औसतन 11.5 फीसदी बच्चे छोड़ रहे स्कूल

देश में स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या भी गंभीर है। पूरे देश में माध्यमिक स्तर पर औसतन 11.5 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। पश्चिम बंगाल में 20 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश 18.3 फीसदी, कर्नाटक में 18.3 फीसदी और असम में 17.5 फीसदी।  

बैठने के लिए सीट तक नहीं, दरी पर बैठते हैं बच्चे

नीति आयोग की रिपोर्ट से इतर, यूपी जैसे राज्य में भी स्कूलों में बैठने के लिए बच्चों के पास सीट की सुविधा नहीं है। आज भी बच्चे चटाई और फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शिक्षकों के लिए बैठने की व्यवस्था है, अलग रूम है लेकिन छात्रों जमीन पर बैठते हैं। सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, बस्ती और देवरिया जिले के कई स्कूलों में यही हाल है।

पढ़ाई पर कितना खर्च करते हैं भारतीय?

शिक्षा पर भारत अपने जीडीपी का सिर्फ 4.6 प्रतिशत खर्च करता है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश ज्यादा खर्च करते हैं। 

Related Topic:#Education News

और पढ़ें