कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एक पुलिस मामले में सुनवाई पूरी होने तक उन्हें राहत देते हुए एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है। जस्टिस के. सुजाता ने आदेश दिया कि खेड़ा के पास अब एक सप्ताह का समय है कि वे संबंधित निचली अदालत में अपनी पक्की जमानत की अर्जी लगा सकें, तब तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। इसका मतलब है कि हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा एक हफ्ते तक गिरफ्तार नहीं कए जा सकेंगे।
यह कानूनी विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा की शिकायत से शुरू हुआ था। पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि रिनिकी के पास एक से ज्यादा पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में ऐसी संपत्ति है जिसका जिक्र हिमंता ने अपने चुनाव के चुनावी हलफनामे में नहीं किया है। इन आरोपों के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। इनमें धारा 175 (चुनाव के संबंध में गलत बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत या सुरक्षा की जालसाजी), 337 (अदालती रिकॉर्ड की जालसाजी), 340 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल), 352 (शांति भंग करने के लिए अपमान) और 356 (मानहानि) शामिल हैं।
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पुलिस की दलीलें
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच काफी लंबी और जोरदार बहस हुई। असम पुलिस की ओर से वकील देवाजीत सैकिया ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि खेड़ा 'फ्लाइट रिस्क' हैं यानी वह गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग सकते हैं। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जब उनकी टीम खेड़ा के दिल्ली वाले घर पहुंची, तो वह वहां से निकलकर सीधे हैदराबाद चले गए थे। पुलिस ने यह सवाल भी उठाया कि खेड़ा ने असम या देश की किसी और अदालत में जाने के बजाय हैदराबाद में याचिका क्यों लगाई जबकि मामला असम का है।
वकीलों की दलीलें
पवन खेड़ा की ओर से देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट में साफ कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और सिर्फ राजनीतिक बदला लेने के लिए की जा रही है। उन्होंने हैदराबाद में याचिका दायर करने का बचाव करते हुए कहा कि पवन खेड़ा का हैदराबाद में भी घर है, इसलिए उन्होंने वहां की कोर्ट से सुरक्षा मांगी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हिंमत बिस्वा सरमा ने कांग्रस पर पलटवार करते हुए कहा था कि बिना किसी कागजात की जांच किए उनके परिवार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस कानून के हिसाब से काम करेगी और आरोपियों को ढूंढ निकालेगी।
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कोर्ट का फैसला
दोनों तरफ की बातें सुनने के बाद जज ने पवन खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ सात दिनों की छूट दे दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह राहत सिर्फ एक हफ्ते के लिए है। इस बीच खेड़ा को निचली अदालत में जाकर अपनी पक्की जमानत के लिए अर्जी देनी होगी। जब तक वह यह अर्जी देंगे, तब तक असम पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। मुख्यमंत्री ने भी इस पर कहा है कि कांग्रेस बिना सबूत के आरोप लगा रही है और पुलिस अपना काम करेगी।