हर साल की तरह इस साल भी देश की राष्ट्रपति कुछ दिनों के लिए शिमला से काम करेंगी। यह परंपरां अंग्रेजों के समय से चली आ रही है और वह यहां अपने आधिकारिक आवास पर रहेंगी।
शिमला पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, Photo Credit: @rashtrapatibhvn
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आज देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने ग्रीषमकालीन प्रवास के लिए पहुंच चुकी हैं। हिमाचल के गवर्नर कविंदर गुप्ता, सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति 6 दिन के लिए राजधानी शिमला से लगभर 13 किलोमीटर दूर मशोबरा के छराबड़ा स्थित राष्ट्रपति भवन रिट्रीट में रुकेंगी। यह गर्मियों के लिए देश की राष्ट्रपति का आधिकारि निवास है। अगले 6 दिनों तक राष्ट्रपति इसी आवास से अपना ऑफिस का काम करेंगीं। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है।
अंग्रेजों ने शिमला को भारत की समर कैपिटल घोषित किया था। इसके बाद से हर गर्मियों में अंग्रेजों का पूरा प्रशासन दिल्ली से शिमला शिफ्ट हो जाता था। उत्तर भारत की गर्मी में शिमला का ठंडा मौसम और पहाड़ी वातावरण इसे गर्मियों में अंग्रेजों की पहली पसंद बनाते थे।
साल 1947 में आजादी के बाद शिमला में स्थित कई पुरानी इमारतें भारत सरकार के अधीन आ गई। मौजूदा राष्ट्रपति भवन भी एक ऐसी इमारत थी जिसे ब्रिटिश अधिकारी इस्तेमाल करते थे। गर्मियों के मौसम में प्रशासन का सारा काम शिमला से ही होता है। 1947 के बाद भी यह परंपरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई बल्कि नए तरीके से शुरू की गई। शुरुआत में देश के राष्ट्रपति इस भवन में नियमित तौर पर आते थे। 1965 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वेपल्ली राधाकृष्णन ने मशोबरा में मौजूद इस भवन को राष्ट्रपति का ऑफिशियल समर रिट्रीट घोषित किया। इसके बाद से हर साल राष्ट्रपति का शिमला आना एक तय परंपरा बन गया। लगभग हर साल राष्ट्रपति गर्मियों में कुछ दिन के लिए शिमला जाते हैं।
शिमला में राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास
रिट्रीट बिल्डिंग के नाम से मशहूर
रिट्रीट बिल्डिंग यानी राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास शिमला शहर से कुछ दूर मशोबरा की पहाड़ी पर बना है। शिमला से इसकी दूरी महज 15 किलोमीटर है। इस बिल्डिंग को 1850 में बनाया गया था। 8 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी इस बिल्डिंग को लकड़ी से बनाया गया है। यह बिल्डिंग करीब 10,628 वर्ग फीट में फैली है।
लीज पर लेकर बनी थी इमारत
इस बिल्डिंग को बनाने के लिए लॉर्ड विलियम ने कोटि के राजा से जमीन लीज पर ली थी। राजा ने जमीन लीज पर देते समय कुछ शर्तें रखी थीं। राजा ने शिमला और मशोबरा गांव से दो सड़कें जनता के लिए खुली रखने के लिए कहा था। इसके साथ ही कोई भी पेड़ ना काटे जाने की शर्त भी लगाई थी। 1886 में कोटि के राजा ने जमीन को फिर से अपने पास रख लिया लेकिन कुछ साल बाद 1895 में वायसराय ने इस जमीन पर फिर से कब्जा कर लिया और फिर आजादी तक यह बिल्डिंग अंग्रेजों के अधीन रही। आजादी के बाद इस बिल्डिंग को देश के राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में पहचान मिली।
यह बिल्डिंग शिमला से कुछ दूर देवदार के घने पेड़ों के बीच बना हुआ है। इस बिल्डिंग में राष्ट्रपति के जीवन से जुड़ी चीजें देख सकते हैं। खास बात यह है कि इस बिल्डिंग का निर्माण पारंपरिक धज्जी शैली से किया गया है, जिसमें जिसमें लकड़ी और मिट्टी का उपयोग होता है। धज्जी शैली इसलिए मशहूर है क्योंकि इस शैली से बनी बिल्डिंग भूकंप के झटकों को काफी हद तक सहन कर लेती है।
राष्ट्रपति का कमरा
मौजूदा समय में इस बिल्डिंग में दो फ्लोर हैं। दूसरे फ्लोर पर राष्ट्रपति और उनके परिवार के लिए छह कमरे बने हुए हैं। इसके साथ ही शानदार डाउनिंग रूम बना हुई है, जिसमें 20 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ऑफिस और स्टाफ के लिए कमरे बने हुए हैं।