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'40 दिन में साबित करें हिंदू हैं वरना', CM योगी को अविमुक्तेश्वरानंद की चेतावनी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का वक्त देते हुए कहा है कि वह साबित करें कि वह हिंदू हैं और गोहत्या बंद करवाएं।

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CM योगी पर भड़के अविमुक्तेश्वरानंद, Photo Credit: Khabargaon

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश भी हुई लेकिन आखिर में वह दुखी मन से मेला क्षेत्र से लौट गए। अब अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि वह 40 दिन में यह साबित करें कि वह हिंदू हैं। अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि वह गाय को राज्यमाता घोषित करें और यूपी में गोहत्या बंद कराएं, वरना उन्हें अहिंदू घोषित किया जाएगा।

 

प्रशासन की ओर से हुई मान-मनौव्वल की कोशिश पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि माफी मांगने के बजाय उन्हें लालच दिया जा रहा था। उत्तर प्रदेश में गोहत्या और गोमांस के व्यापार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोहत्या करवाने वाले को माफी नहीं दी जा सकी। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि 10-11 मार्च को वह लखनऊ पहुंचेंगे और संत समाज के साथ बैठकर फैसला लिया जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: 'दुखी मन से लौट रहा हूं, कल्पना नहीं की थी', प्रयागराज से लौटे अविमुक्तेश्वरानंद

 

माफी मांगे जाने के सवाल पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, '10-11 दिन हम बैठे थे प्रयाग में, अब वह बात निकल चुकी है। अब अगले माघ मेले में यह बात शुरू होगी। माफी की बात अब निकल चुकी है। अगले माघ मेले में पहले ही दिन से यह मुद्दा पहले ही दिन से उठ जाएगा। सिर्फ एक आवाज है कि योगी आदित्यनाथ गाय को राज्यमाता घोषित करें और गो हत्या बंद करवाएं।'

योगी पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

 

सीएम योगी को आड़े हाथ लेते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है, 'पहले वह अपने आप को हिंदू सिद्ध करें। बात यह है कि हमारा प्रमाण तो उन्होंने मांग लिया। अब उन्हें प्रमाण देने की जरूरत है कि वह हिंदू हैं कि नहीं। हिंदू होने की पहली शर्त है कि गौरक्षक होना चाहिए। उनके प्रदेश में निरंतर गोहत्या हो रही है इसलिए हमने उनको कहा है कि पहले तो अपने प्रदेश से गोमांस का निर्यात बंद करिए। यह आपके हाथ में हैं। हमने 40 दिन का वक्त दिया है। अगर 40 दिन में वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हम अपने धार्मिक अधिकारों का इस्तेमाल करके उन्हें अहिंदू घोषित करेंगे।'

 

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वाराणसी में मीडिया से बातचीत में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है, 'बात यह है कि माफी मांगने का भी एक तरीका होता है। माफी, माफी ही होती है, उसके लिए क्षमायाचना करनी पड़ती है। वह हमें लालच दे रहे थे कि आप ऐसे स्नान कर लीजिए, आपके ऊपर हम फूल बरसा देंगे, अगले वर्षों के लिए SOP बना देंगे, चारों शंकराचार्यों के लिए SOP बना देंगे। इस तरह की बातें उनकी तरफ से आई थीं, जिसे हमने नकार दिया। हमने स्पष्ट कहा कि जिन संन्यासियों पर, जिन बटुकों पर, जिन ब्रह्मचारियों पर, जिन माताओं पर, जिन बंधुओं पर और जिन वृद्धों पर आपने लाठी बरसाई है, एक ही शर्त है कि माफी मांगिए, क्षमायाचना करिए। यदि वे क्षमा कर दें तो ही आगे बढ़िए लेकिन वे सामने नहीं आए। वे हमें लोभ और लालच देना चाहते थे, जिसे हमने स्वीकार नहीं किया।'

 

 

यह भी पढ़ें: कभी लाठी पड़ी, अब शिष्य पिटे, विवादों में क्यों रहते हैं अविमुक्तेश्वरानंद?

 

बता दें कि अपने शिष्यों के साथ संगम जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तर प्रदेश की पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने रोका था। प्रशासन ने उन्हें पैदल ही घाट तक जाने को कहा था और इसी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। बाद में कुछ बटुकों और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की बात भी सामने आई थी। इसी को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए थे और धरने पर बैठ गए थे। 


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