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सच में सबसे ज्यादा पेटेंट फाइल कर रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी? पूरा सच जान लीजिए

AI समिट में गड़बड़ी करने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी चर्चा में है। अचानक उसकी ओर से फाइल किए गए पेटेंट को लेकर भी चर्चा होने लगी है क्योंकि एक साल उसने IITs से भी ज्यादा पेटेंट करा लिए।

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गलगोटिया यूनिवर्सिटी, Photo Credit: Social Media

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AI इंपैक्ट समिट 2026 में एक रोबोटिक डॉग को लेकर किए गए दावे के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी की जमकर फजीहत हुई। आखिर में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया। अब इस घटना के चलते गलगोटिया के साथ-साथ इस सम्मेलन के आयोजक यानी भारत सरकार की भी आलोचना हो रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर जिन लोगों को AI समिट में स्टॉल लगाने या पवेलियन बनाने की अनुमति दी गई, उनके प्रोडक्ट्स या उनकी इनोवेशन की जांच क्यों नहीं की गई? इसी बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पेटेंट को लेकर भी चर्चा हो रही है। एक दावा किया जा रहा है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अकेले ही इतने पेटेंट करा लिए जितने सारे IIT मिलकर नहीं करा पाए।

 

अगर आप कोई खोज करते हैं तो भारत का कानून आपको यह अधिकार देता है कि आप उसे अपने तक सुरक्षित कर सकें ताकि कोई और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल न कर सके। इसमें यह ध्यान दिया जाता है कि किसी और ने वैसी खोज न की हो। एक बार पेटेंट रजिस्टर हो जाने के बाद 20 साल तक पेटेंट आपके पास रहता है।

कौन करा रहा सबसे ज्यादा पेटेंट?

 

हर साल पेटेंट के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी रिपोर्ट ऑफिस ऑफ द कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइन्स, ट्रेडमार्क्स एंड जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स की ओर से जारी की जाती है। साल 2024-25 की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि किस संस्थान ने, किस कंपनी ने कितने पेटेंट कराए और किस सेक्टर में कराए। यही रिपोर्ट बताती है कि हर साल पेटेंट, डिजाइन पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट रजिस्ट्रेन के लिए आवदनों की संख्या बढ़ती जा रही है।

 

यह भी पढ़ें: गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ब्लंडर्स की पूरी कहानी, AI समिट से बाहर कैसे हुई?

 

इसी रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024-25 में कुल 1,10,375 पेटेंट ऐप्लिकेशन फाइल किए गए जिसमें 33,504 को मंजूरी दी गई। पेटेंट, ट्रेडमार्क, जीआई और कॉपीराइट जैसे सभी कामों को मिलाकर जरिए सरकार को कुल 1449.47 करोड़ रुपये की कमाई भी हुई। 

सच में IIT से ज्यादा पेटेंट गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कराए?

 

IIT से तुलना करने वाला डेटा साल 2022-23 का है। इसमें बताया गया है कि इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी के पेटेंट कराने वाले पांच संस्थानों में सबसे आगे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी थी और उसने एक साल में कुल 512 पेटेंट के लिए ऐप्लिकेशन फाइल किए। उस साल गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने IT में कुल 209 पेटेंट ऐप्लिकेशन फाइल किए।

 

अगर साइंटिफिक रिसर्च की बात करें तो सभी IITs ने मिलाकर 803 पेटेंट के लिए ऐप्लिकेशन फाइल किए। साइंटिफिक रिसर्च के टॉप 10 संस्थानों में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम नहीं है। जब शिक्षण संस्थानों की बात होती है तो उस साल सबसे आगे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी थी और उसने कुल 1387 पेटेंट ऐप्लिकेशन फाइल किए। जैन यूनिवर्सिटी ने कुल 1093 और गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कुल 1089 पेटेंट फाइल किए। सभी IITs ने कुल मिलाकर 803 और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने 752 पेटेंट फाइल किए।

 

यह भी पढ़ें: रोबोटिक डॉग पर हुई ट्रोलिंग तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?

 

यही रिपोर्ट बताती है कि IT सेक्टर में सबसे ज्यादा पेटेंट ऐप्लिकेशन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने दिए। LPU ने कुल 884, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने 652 और गूगल ने 467 पेटेंट के लिए आवेदन किया। अगर शैक्षणिक संस्थानों के पेटेंट की बात करें तो LPU ने इस साल कुल मिलाकर 2242 पेटेंट के लिए आवेदन दिया। दूसरे नंबर रहे सवीता इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेस (SIMATS) ने कुल 2038, सभी IITs ने सम्मिलित रूप से 1740, जैन यूनिवर्सिटी ने 1504 ऐप्लिकेशन दिए। इस साल टॉप 10 की लिस्ट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम शामिल नहीं था।


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