शिवसेना (UBT) के सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 'इंडिया गठबंधन' की मीटिंग बुलाने का आह्वान किया है। उन्होंने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि इंडिया ब्लॉक की बैठक तभी होती है, जब लोकसभा चुनाव पास आते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद इन गठबंधन में किसी के बीच कोई बातचीत नहीं होती। तब तक इंडिया ब्लॉक में लोग क्या कर रहे हैं, किसी को पता नहीं चलता है।
संजय राउत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के द्वारा भारत के साथ किए गए व्यापारिक समझौते को लेकर विपक्ष की साझा बैठक पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में बहुत सारी दिक्कतें हैं। बीते लोकसभा चुनाव, 2024 में विपक्षी इंडिया गठबंधन ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के कड़ी टक्कर दी थी, जिसके बाद इस गठबंधन की मजबूती सामने देश के सामने आई थी।
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देश में बहुत सारे मुद्दे हैं- राउत
उन्होंने कहा, 'अमेरिका के साथ हुई डील का नतीजा यह होगा कि देश के किसान मरेंगे, आत्महत्या करेंगे और भूखे मरेंगे। लेकिन इंडिया ब्लॉक के सिर्फ संसद में आवाज उठाने से काम नहीं चलने वाला। वे (मोदी सरकार) राहुल गांधी को भी संसद में बोलने नहीं देते। क्या हम बाहर कुछ कर सकते हैं? देश में बहुत सारे मुद्दे हैं, मणिपुर का मुद्दा, कानून-व्यवस्था का मुद्दा है।'
'सालों तक, वे किसी से बात नहीं करते'
संजय राउत ने आगे कहा कि इंडिया ब्लॉक को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'इंडिया गठबंधन के लोगों को एक-दूसरे से बातचीत करनी चाहिए। महीनों, सालों तक, वे किसी से बात नहीं करते। चाहे वह उद्धव ठाकरे हों या दूसरे नेता हों हम चाहते हैं कि इंडिया गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव से पहले ही नहीं, बल्कि उससे भी पहले सक्रिय हो। किसी ने सुझाव दिया है कि ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करना चाहिए। दूसरे का कहना है कि स्टालिन को करना चाहिए। यह उनकी निजी राय है। इंडिया गठबंधन की मीटिंग होनी चाहिए।
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कांग्रेस की आई प्रतिक्रिया
वहीं, संजय राउत के बयान के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी नेता और कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि संजय राउत वरिष्ठ नेता हैं। अगर उन्होंने कुछ कहा है तो बेशक इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी सदस्य इसे सुनेंगे और देखेंगे कि आगे क्या करना है।
बता दें कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को बुरी हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी भी साथ लड़ी थीं। इसके बाद मुंबई के बीएमसी चुनावों में भी शिवसेना (यूबीटी) को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी) को मालूम है कि बिना समूचे विपक्ष का साथ लिए आने वाले चुनावों में उसे मुश्किल हो सकती है।