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सुप्रीम कोर्ट से बिक्रम मजीठिया को मिली जमानत, AAP बोली- हमारे पास मजबूत सबूत

एनडीपीएस के बाद आय से अधिक संपत्ति मामले में भी अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत मिल गई है। उनके खिलाफ 2025 में ही मामला दर्ज किया गया था।

Bikram Singh Majithia

अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया। ( Photo Credit: PTI)

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पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल चीमा ने मजीठिया को मिली जमानत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, जमानत मिलने का यह मतलब नहीं है कि वह बरी हो गए हैं। हमारे पास मजबूत सबूत हैं। जब हम उन्हें कोर्ट में पेश करेंगे तो उन्हें जरूर सजा मिलेगी।'

 

जमानत देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को 2022 में पहले ही एनडीपीएस मामले में जमानत मिल चुकी है। उस आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की अपील भी 2025 में खारिज कर दी गई थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की। आय से अधिक संपत्ति का मामला 2006 से 2017 के बीच का है, हालांकि मामला 2025 में दर्ज किया गया। इन परिस्थितियों में जमानत दी गई है।

 

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बता दें कि पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद बिक्रम मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि मजीठिया पिछले सात महीनों से इस मामले में हिरासत में हैं।

 

 

 

 

आय से अधिक संपत्ति मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को बिक्रम मजीठिया को गिरफ्तार किया था। उन पर 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाने का आरोप है। बता दें कि 2021 में पंजाब पुलिस ने ड्रग्स मामले भी मजीठिया के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

 

मजीठिया के वकील एस मुरलीधर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को पहले नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट- 1985 के तहत दर्ज एक मामले में जमानत मिल गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका को भी खारिज कर दिया था।

 

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हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?

पिछले साल 4 दिसंबर को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने यह कहते हुए बिक्रम मजीठिया की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था कि उनके द्वारा जांच को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने पंजाब विजिलेंस को तीन महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और कहा था कि इसके बाद याचिकाकर्ता अपनी जमानत का आवेदन कर सकत है।


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