तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ने गुरुवार को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाकर उसे 'काला कानून' बताया। स्टालिन ने आरोप लगाया कि परिसीमन का काला कानून तमिल लोगों को उनकी ही धरती पर शरणार्थी बना देगा।
महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले सीएम स्टालिन ने काला झंडा लहराया और केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और नारे लगाए। इस बीच करूमंडापम में डीएमके के कार्यकर्ता काले झंडे लेकर सड़कों पर खड़े हो गए और विधेयक के विरोध में नारे लगाए।
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मुख्यमंत्री ने दिया नारा
मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार के सिलसिले में पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में हैं और वहां उन्होंने विधेयक की प्रति जलाई। स्टालिन और काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया, जबकि अन्य लोगों ने इस बीच नारे लगाए। उन्होंने 'पोराडावोम, वेलवोम ओन्द्रगा' का नारा भी लगाया, जिसका मतलब है- आइए हम मिलकर संघर्ष करें, साथ मिलकर जीतें।
'पूरे तमिलनाडु में फैले विरोध की ज्वाला'
एक बयान में सीएम स्टालिन ने कहा, 'विरोध की ज्वाला पूरे तमिलनाडु में फैले। फासीवादी बीजेपी का घमंड चकनाचूर हो। तब, तमिलनाडु से उठी हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। वह तभी शांत हुई जब दिल्ली झुकने के लिए मजबूर हुई।' सीएम स्टालिन का इशारा स्पष्ट रूप से राज्य में 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन की ओर था।
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'पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी आग'
उन्होंने कहा, 'आज मैंने इस काले कानून की प्रति जलाकर और इसके खिलाफ काला झंडा दिखाकर उस आग को फिर से जला दिया है, जो तमिलों को हमारी ही धरती पर शरणार्थी बनाने का प्रयास करता है। यह आग अब पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी। यह भड़केगी, यह प्रचंड होगी और यह बीजेपी के अहंकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी।'
केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन का कड़ा विरोध करते हुए बुधवार को उन्होंने राज्य भर में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के इस कदम से तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचेगा।