भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले के बाद से हालात तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच राजनायिक संबंध न के बराबर हैं। भारत ने सिंधु जल समझौते को नए सिरे से लिखने की कवायद में जुटा है। भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद, अब जम्मू-कश्मीर में जल-विद्युत परियोजनाओं को लेकर नया एलान किया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चिनाब नदी पर रतले जल-विद्युत परियोजना के डैम कंक्रीटिंग कार्य की आधारशिला रखी है। पाकिस्तान को यह प्रोजेक्ट हमेशा से खटकता रहा है।
भारत के दो अहम प्रोजेक्ट, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चल रहे हैं। 1,000 मेगावाट की पाकल दुल और 390 मेगावाट की दुल हस्ती बिजली परियोजनाएं केंद्र सरकार चला रही है। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इन दोनों का जगहों का दौरा किया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रतले जलविद्युत परियोजना स्थल का भी दौरा किया है। उन्होंने बांध के कंक्रीटिंग कार्यों की आधारशिला रखी है। यह प्रोजेक्ट क्या है, पाकिस्तान इसे खतरा क्यों मानता है, आइए समझते हैं-
रतले जल विद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर स्थित एक विद्युत परियोजना है। यह रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट है, यानी नदी का पानी रोककर नहीं, बहते हुए इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी कुल स्थापित क्षमता 850 मेगावाट है। यह परियोजना NHPC और जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम के संयुक्त उपक्रम का हिस्सा है। इसे रतले हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से विकसित किया जा रहा है। इसमें 133 मीटर ऊंचा बांध बनाया जा रहा है। हर साल यह 3136 मिलियन यूनिट बिजली पैदा करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5282 करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट, 2026-2028 तक पूरा होगा।
पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर हमेशा से भारत से डरता रहा है। यह मामला, नीदरलैंड के हेग में परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन तक पहुंच चुका है। पाकिस्तान का कहना है कि झेलम और चेनाब के किसी भी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के चलने से पाकिस्तान को तगड़ा नुकसान पहुंचेगा।
पाकिस्तान का कहना है कि इन परियोजनाओं से पाकिस्तान पहुंचने वाला पानी कम हो जाएगा, जो उसकी 80 फीसदी सिंचित कृषि जमीन के लिए जरूरी है। भारत के लिए यह बिजली का बड़ा सोर्स हो जाएगा लेकिन पाकिस्तान को लग रहा है कि यह वहां त्रासदी ला सकता है।
पाकिस्तान के ऐतराज की एक वजह यह है कि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता हुआ था। चिनाब, झेलम और सिंधु का पानी पाकिस्तान को मिलता है, भारत के अधिकार इन पर सीमित रहे हैं। भारत को यह अधिकार है कि सीमित बिजली परियोजनाएं बनाई जा सकती हैं।
पाकिस्तान ने कई वैश्विक मंचों पर कहा है कि रतले प्रोजेक्ट से भारत ज्यादा पानी स्टोर करेगा, जिसकी वजह से पाकिस्तान में सूखा पड़ सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत का इससे पानी पर अधिकार ज्यादा बढ़ जाएगा। बाढ़ के दिनों में भारत और ज्यादा और नियंत्रित पानी छोड़ देगा। पाकिस्तान को लगता है कि भारत, अपनी जल विद्युत परियोजनाओं की मदद से पानी का इस्तेमाल हथियार की तरह कर सकता है। भारत ने जब से सिंधु जल समझौते को रोकने की बात कही है, पाकिस्तान, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में शिकायत कर चुका है।
भारत का रुख क्या है?
भारत कहता है कि प्रोजेक्ट संधि के दायरे में है और पाकिस्तान को कोई नुकसान पहुंचाने की योजना नहीं है। सिर्फ रतले ही नहीं, चिनाब और सिंधु के पर पावर प्रोजेक्ट से पाकिस्तान खतरा महसूस करता है।