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'26/11 ने झकझोर दिया था...', पाकिस्तान पर क्या सोचते थे मनमोहन सिंह?

मनमोहन सिंह साल 2004 से लेकर 2014 तक लगातार 10 साल देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। वह पड़ोसियों से बेहतर संबंध चाहते थे।

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डॉ. मनमोहन सिंह पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध चाहते थे। (तस्वीर-PTI)

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डॉ. मनमोहन सिंह को दुनिया याद कर रही है। उनकी सरकार में पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे पकंज सरन ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध बनाने चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। 

पकंज सरन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के करीबी सहयोगी थे। मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पंकज सरन ने कहा कि मनमोहन सिंह विनम्रता के प्रतीक थे। उन्होंने पड़ोसियों से बेहतर संबंध चाहा लेकिन यह नहीं हो सका।  

पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते चाहते थे मनमोहन सिंह
पंकज सरन ने कहा, 'पड़ोसियों के बीच, उन्होंने पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता हासिल नहीं हुई। उन्होंने कोशिश की और वह बहुत निराश थे कि उनके प्रयास सफल नहीं हुए। वास्तव में, 2008 में जब वह प्रधानमंत्री थे, तब 26/11 के मुंबई हमलों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था।'

पाकिस्तान पर हमले का बना लिया था मन
जब भारत पर आतंकी हमला हुआ था तो उन्होंने पाकिस्तान पर हमले का मन बना लिया था। ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरून ने अपनी किताब में कहा था कि ऐसा मनमोहन सिंह सोच रहे थे। वह संत नेता था। उन्होंने युद्ध के परिणामों को सोचने के बाद यह टाल दिया था। वह पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते चाहते थे।

मनमोहन सिंह को कैसे याद कर रहे हैं पंकज सरन?
पकंज सरन ने कहा, 'मनमोहन सिंह हमेशा एक अच्छे श्रोता, बुद्धिजीवी, विश्व स्तर के अर्थशास्त्री और व्यापक रूप से सम्मानित व्यक्ति रहे हैं। वह 2008 में जी-20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत में पहले प्रधानमंत्री थे और उन्होंने वैश्विक नेताओं के बीच बहुत उच्च प्रतिष्ठा अर्जित की, जिनकी अर्थशास्त्र की समझ। कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि वह एक बहुत अच्छे व्यक्ति, वह निजी जीवन और सार्वजनिक जीवन, दोनों ही क्षेत्र में एक महान इंसान थे।'

'प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद नहीं की थी'
पंकज सरन ने कहा, 'वह आम सहमति बनाने वाले व्यक्ति थे, बहुत ही सरल व्यक्ति थे, उन्होंने कभी प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन उन्होंने 10 वर्षों तक सेवा की।' पंकज सरन रूस में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उन्होंने भारत और विदेशों में विभिन्न पदों पर भी कार्य किया जिसमें बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त का पद भी शामिल है। उन्हें 2018 में उप एनएसए नियुक्त किया गया था।

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