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रोपवे को लेकर वैष्णो देवी में हंगामा थम क्यों नहीं रहा?

स्थानीय दुकानदार, बिजनेसमैन, पालकी-पिट्ठू वाले और खच्चर वाले लोगों ने 72 घंटे के बंद का ऐलान किया है। जानिए क्या है पूरा मामला?

representational image : PTI

प्रतीकात्मक तस्वीर । पीटीआई

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जम्मू में माता वैष्णो देवी में जाने के लिए रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद खत्म ही नहीं हो रहा है। 25 दिसंबर से कटरा में 72 घंटे के बंद का ऐलान किया गया है।

 

यह माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति द्वारा आयोजित यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय दुकानदार, बिजनेसमैन, पालकी-पिट्ठू वाले और खच्चर वाले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कटरा में सारी आर्थिक गतिविधियां बंद रहेंगी।


श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पिछले महीने कहा था कि वह एक रोपवे लगाएगा ताकि ज्यादा उम्र के लोगों, बच्चों और जिन्हें भी दर्शन करने के लिए जाने में दिक्कत है उन्हें दर्शन के लिए आने में आसानी हो सके।

300 करोड़ की लागत से बनेगा

300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले यह रोपवे कटरा से सांझीछत को जोड़ेगा। यानी हेलिकॉप्टर से पहुंचने वाले लोग और रोपवे से पहुंचने वाले लोग एक ही जगह पहुंचेंगे और वहां से पैदल सिर्फ 2.5 किलोमीटर की यात्रा करके मंदिर तक पहुंच जाएंगे।

 

सूचना के मुताबिक इसे 2026 से शुरू कर दिया जाएगा और प्रतिदिन एक हजार लोग इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। बता दें कि पिछले साल 86 लाख लोगों ने वैष्णो देवी के दर्शन किए थे और हर साल यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।

क्यों हो रहा है विरोध

दरअसल, काफी लोग हैं जो कि माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले रास्ते पर पालकी या खच्चरों के जरिए लोगों को ऊपर पहुंचाते हैं और यही उनके रोज़गार का ज़रिया है। इनको लगता है कि रोपवे बन जाने के बाद लोग इनकी सेवाएं नहीं लेंगे जिससे ये बेरोज़गार हो जाएंगे।

 

इनके अलावा स्थानीय दुकानदार और बिजनेसमैन भी इसका विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर लोग रोपवे का इस्तेमाल करने लगे तो उनका रोज़गार खत्म हो जाएगा।

 

उनका कहना है कि वे इसके लिए लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे तीन साल से इसके लिए लड़ रहे हैं। इसका पहले भी विरोध हो चुका है और इसके लिए एक प्रोजेक्ट को स्थगित भी करना पड़ा था।

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