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दही चूड़ा भोज के आमंत्रण के बहाने तेजप्रताप ने बढ़ाया सियासी पारा

बिहार की सियासत में इन दिनों लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव काफी सक्रिय हैं। तेजप्रताप ने दही चूड़ा भोज के आमंत्रण के बहाने सियासी पारा बढ़ा दिया है।

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विजय सिन्हा को आमंत्रण देते तेजप्रताप, Photo Credit: tej pratap

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संजय सिंह, पटना, बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवारों में से एक लालू यादव परिवार के बड़े बेटे तेजप्रताप ने चुनाव हारने के बाद भी चुप्पी नहीं साधी है। चुनाव में हार मिलने के कुछ ही दिन बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरु किया। अब वह मकरसंक्रांति के बहाने विभिन्न दलों के नेताओं को अपने घर भोज पर आमंत्रित कर रहे हैं। वह खुद जाकर लोगों को आमंत्रण पत्र भी बांट रहे हैं। उनका यह दही चूडा भोज बिहार के सियासी गलियारे में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। 

 

तेजप्रताप यादव का कहना है कि वह अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी आमंत्रण भेजेंगे। तेजप्रताप के इस फैसले ने राजनीतिक हलचल को और ज्यादा बढ़ा दिया है। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि तेजप्रताप का झुकाव नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी की ओर बढ़ता जा रहा है। 

लालू ने शुरू की थी परंपरा

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 1994-1995 में दही चूड़ा भोज की परंपरा शुरू की थी। भोज करने का उद्देश्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करना था। इस भोज में राजनीतिक खिचड़ी भी पकती थी। फिर इस परंपरा की शुरुआत जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण ने की। लालू यादव द्वारा शुरू किए गए चूड़ा दही भोज के बाद ही जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में जनता दल से अलग हुए थे। 

 

कई सालों बाद जब महागठबंधन के साथ मिलकर उन्होंने सरकार बनाई थी। तब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश के सामने दही चूड़ा परोसा था। बड़े भाई की हैसियत से लालू ने नीतीश को दही का टीका भी लगाया था लेकिन यह राजनीतिक रिश्ता ज्यादा दिनों तक कारगर नही रहा। फिर 2022 में दोनो मिलकर सरकार में आए, कुछ ही दिनों बाद फिर संबंध में दरार आ गई और नीतीश फिर से बीजेपी के साथ चले गए। 

तेजस्वी के बाहर रहने का उठाया फायदा

आरजेडी विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गई है। इस पराजय के कारण लालू परिवार में फिर गृह कलह शुरू हो गया। तेजप्रताप पहले ही पार्टी और घर से बेदखल हो चुके थे। चुनावी हार के बाद बहन रोहिणी आचार्या ने तेजस्वी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बहन का आरोप था कि तेजस्वी के गलत निर्णय के कारण ही पार्टी की हार हुई है। 

 

 

इन विवादों के बीच तेजस्वी यादव विदेश यात्रा पर चले गए। मौका पाकर तेजप्रताप ने पहली जनवरी को अपनी मां राबड़ी देवी से मिलकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपना अलग दल राष्ट्रीय जनशक्ति दल चुनाव से पहले ही बना लिया था। तेजप्रताप लगातार कह रहे हैं कि आरजेडी में कभी नही जाएंगे। उनका यह भी दावा है कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी वह अपने उम्मीदवार खड़ा करेंगे। उनकी सक्रियता से आरजेडी की परेशानी बढ़ सकती है। 

 

डिप्टी सीएम को दिया आमंत्रण 

कुछ दिन पहले तेजप्रताप बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की प्रशंसा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बेहतर काम कर रहे हैं। आज उन्होंने दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से मुलाकात कर भोज में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भोज में आने का न्योता वे राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी देंगे। 

 

 

सबसे बड़ी बात यह है कि आमंत्रण पत्र लेकर स्वयं तेजप्रताप जा रहे हैं। पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा तो, उन्होंने कहा कि वह अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी निमंत्रण देंगे। इस बीच राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि तेजप्रताप का झुकाव एनडीए की ओर बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि वह कांग्रेस को लेकर लगातार हमलावार रहते हैं।


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