ना कोई प्रशासनिक अनुभव था, ना कभी मंत्री रहे लेकिन वी डी सतीशन अपने दो सीनियर यानी रमेश चेन्निथला और के सी वेणुगोपाल पर भारी पड़ गए हैं। कांग्रेस की ओर से एलान किया गया है कि अब वी डी सतीशन ही केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। लगातार कहा जा रहा था कि विधायकों का समर्थन के सी वेणुगोपाल के साथ इसलिए वही मुख्यमंत्री होंगे। इसके उलट अंतिम मुहर वी डी सतीशन के नाम पर लगी है। वही सतीशन जो कभी अपनी यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष तक नहीं बन पाए थे। केरल की सरकार में कभी मंत्री भी नहीं बने और प्रदेश कांग्रेस के मुखिया भी नहीं बने लेकिन अब वह सीधे मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि इसके पीछे की असली वजह गठबंधन सहयोगियों से उनका तालमेल, निजी स्तर पर उनकी लोकप्रियता और जनता से उनका खुद का संपर्क है। कहा जा रहा है कि वह महिलाओं के बीच खूब लोकप्रिय हैं और अपनी विधानसभा में भी उनकी पकड़ मजबूत है। वह साल 2001 में अपना पहला चुनाव इसी सीट से जीते और तब से अब तक लगातार 6 बार जीत हासिल कर चुके हैं। यह दिखाता है कि वह अपनी विधानसभा में भी खूब लोकप्रिय रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी अपनी खूब छाप छोड़ी थी और जनता के बीच लोकप्रिय हुए थे।
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बड़े पदों से चूकते रहे सतीशन
वी डी सतीशन के बारे में बताया जा रहा है कि वह छात्र जीवन में एनएसयूआई के सेक्रेटरी रहे लेकिन KSU के अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए थे। वह यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के दावेदार थे लेकिन इस पद तक कभी नहीं पहुंच पाए। लगातार सक्रियता के बावजूद वह केरल कांग्रेस के अध्यक्ष भी नहीं बने। इतना ही नहीं, ओमान चांडी की सरकार में कई बार मंत्री पद को लेकर भी उनकी चर्चा हुई लेकिन वह इस पद पर भी नहीं पहुंच सके। आखिरकार साल 2021 में जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ओमान चांडी और रमेश चेन्निथला के गुट के इतर नेताओं को खोजना शुरू किया तब वी डी सतीशन को मौका दिया गया।
2021 में नेता विपक्ष बनाए गए वी डी सतीशन अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। पन्नगाड हाई स्कूल और सेक्रेड हार्ट ककॉलेज लाइफ से पढ़े वी डी सतीशन आगे चलकर आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी, यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर और MG यूनिवर्सिटी यूनियन के चेयरमैन बने। एक समय ऐसा भी था जब उनका मन राजनीति से हटने लगा था और वह वकालत में अपना करियर बनाने की ओर चल पड़े थे। वह हाई कोर्ट से वकालत शुरू करके सुप्रीम कोर्ट जाना चाहते थे लेकिन राजनीति से खुद को दूर नहीं रख सके।
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साल 1996 में कांग्रेस ने परावुर से ही उन्हें पहली बार चुनाव में उतारा। उन्होंने कोशिश की लेकिन लेफ्ट के पी राजू से मामूली अंतर से हार गए। अगले पांच साल मेहनत की और 2001 में उसी सीट पर लेफ्ट को हराकर दिखाया। पहली जीत मिलने की देरी भर थी, उसके बाद सतीशन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2006 में वी एस अच्युतानंदन की अगुवाई में जब लेफ्ट ने कांग्रेस को केरल में बुरी तरह हराया तब भी सतीशन नहीं हारे।
कैसे कामयाब हुए सतीशन?
सतीशन केरल को कितना बेहतर समझते हैं यह कई बार उनके आकलन से साबित होता रहा। जहां तमाम एग्जिट पोल्स में UDF की 70 से 90 सीटें दिखाई जा रही थीं, वहीं सतीशन बार-बार 100 से ज्यादा सीटें जीतने की बात कह रहे थे। इससे पहले लोकसभा चुनाव में भी उनका अनुमान एकदम सटीक साबित हुआ था। इस बार सतीशन ने भविष्यवाणी की थी कि पिनराई विजयन सरकार के कई मंत्री चुनाव हारेंगे और उनकी यह बात भी सच साबित हुई।
'द वीक' को दिए एक इंटरव्यू में सतीशन ने बताया था कि उनका चुनावी अभियान डेटा, संगठन की क्षमता और नैरेटिव पर आधारित था। सतीशन ने केरल में कांग्रेस की बूथ कमेटियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए काम किया। साथ ही, आपसी विवाद को कम करने की भी खूब कोशिश की। गठबंधन के सहयोगियों के साथ भी सतीशन ने खूब काम किया और शायद यही वजह है कि IUML जैसे दल सिर्फ उनके नाम पर राजी थे।
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कट्टर कांग्रेसी वाली छवि
बीते पांच साल में वी डी सतीशन ने बिना लाग लपेट के अपनी बात कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखी। साथ ही साथ केरल में उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत किया। उन्होंने पंडित नेहरू की वामपंथी झुकाव वाली विचारधारा पर काम करते हुए केरल में लेफ्ट के सामने कांग्रेस को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा, मीडिया में, रैलियों में, सभाओं में और विज्ञापनों में भी कांग्रेस की बात को मुखरता से पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और फर्स्ट टाइम वोटर्स तक को पार्टी से जोड़ने की दिशा में काम किया और सभी योजनाओं को जमीन पर उतारने में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मदद ली। सतीशन के पक्ष में एक बात यह भी गई कि उन्होंने सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मदद करने से आगे बढ़कर अपने गठबंधन सहयोगियों की भी खूब मदद की। यही बात उनके पक्ष में गई और अपनी पार्टी के विधायकों से ज्यादा उनके गठबंधन सहयोगी उनके पक्ष में खड़े दिखे।