तमिलनाडु में विजय चंद्रशेखर जोसेफ की एंट्री, उनकी फिल्मों की तरह ही धमाकेदार अंदाज हुई। पहले ही चुनाव में उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने वह कर दिया, जो दशकों पहले एमजी रामचंद्रन और एम करुणानिधि से भी नहीं हो सका था। तमिलनाडु के सबसे बड़े सुपरस्टार विजय, सियासत में इतनी बड़ी जीत हासिल करने के बाद भी बहुमत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें एक-एक विधायक के समर्थन के लिए जोड़-तोड़ करनी पड़ रही है। राज्य में ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) और द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) जैसी बड़ी दो द्रविड़ पार्टियां हैं, जिनकी वजह से विजय की सियासी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं।
तमिलगा वेत्री कझगम ने यह चुनाव, अपने दम पर, अकेले लड़ा था। पार्टी ने 108 सीटें जीत लीं। इससे DMK और AIADMK की दशकों पुरानी पकड़ टूट गई। विजय की पार्टी TVK के पास बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें नहीं हैं। विजय 2 सीटों से जीते, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। ऐसे में TVK के पास वोटिंग के लिए 107 विधायक ही रह गए। बहुमत का आंकड़ा अब 117 हो गया है।
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कांग्रेस ने DMK को भूल TVK को दिया समर्थन फिर भी पंगा
5 मई की रात कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन से विजय के पास 112-113 तक पहुंच गया लेकिन वह अभी भी बहुमत से दूर थे। कांग्रेस ने शर्त रखी कि विजय भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसे हिंदुत्ववादी राजनीति करने वाले दल के साथ नहीं जाएंगे।
लेफ्ट और VCK का भी मिला साथ
8 मई को CPI और CPI (M) ने औपचारिक रूप से TVK को समर्थन की घोषणा कर दी। दोनों पार्टियों के 2-2 यानी 4 विधायक मिल गए। वीसीके भी उनके साथ जाने को तैयार हो रही है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के 2 विधायक भी समर्थन दे रहे हैं। TVK के पास कांग्रेस, वामपंथी और अन्य छोटी पार्टियों के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पूरा हो चुका है।
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गवर्नर सरकार गठन की मंजूरी देंगे?
राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर की तरफ से विजय को सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिला है। विजय तीन बार गवर्नर से मिल चुके हैं। TVK का दावा है कि शनिवार सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
क्यों बड़ी है यह जीत?
यह जीत इसलिए खास है क्योंकि विजय ने चुनाव से पहले कोई गठबंधन नहीं किया था। उन्होंने पुराने दलों को बड़ी हार दी। सरकार चलाने के लिए उन्हें उन्हीं दलों के समर्थन की जरूरत पड़ गई, जिनके खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोला था। DMK अब विपक्ष में है और उसके कई सहयोगी विजय के साथ चले गए हैं। कांग्रेस ने दशकों पुरानी दोस्ती तोड़ी है। अब गेंद राज्यपाल के पाले में है, वह विजय को सरकार बनाने का न्योता देते हैं या नहीं।