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यूपी चुनाव 2027: यादव और मुस्लिम मतदाताओं के सहारे कैसे पार होगी सपा की नाव?

अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव हैं। बीजेपी जहां तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी में जुटी है तो वहीं सपा हर हाल में वापसी करना चाहती है। अब सियासी दलों ने अपने अपने हिसाब से मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया है। मुस्लिम और यादव मतदाताओं के अलावा सपा की निगाह ब्राह्मणों पर भी है।

Akhilesh Yadav

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। (Photo Credit: PTI)

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उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हुंकार भरना शुरू कर दिया है। वह महंगाई, बेरोजगारी व अपराध के मुद्दों को लेकर हमला कर रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी में मुख्य रूप से यादव व मुस्लिम समुदाय के लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में क्या यादव व मुस्लिम वोटरों के सहारे सपा की नाव पार लग सकेगी।

 

लोकसभा चुनाव में सपा सुप्रीमो ने पीडीए, मतलब पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक को साथ लेकर चलने पर जोर दिया था। वह विधानसभा चुनाव में भी पीडीए के साथ होने का दावा कर रहे हैं।

संविधान में बदलाव के प्रचार से जीती थी 37 लोकसभा की सीटें

बीते लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगाया और इसका खूब प्रचार किया। प्रदेश के अनुसूचित जाति के मतदाताओं पर इसका असर पड़ा। बसपा के साथ-साथ सपा को भी अनुसूचित जाति के मतदाताओं का वोट मिला। हालांकि सपा इसे अपना वोटर मान रही है।

 

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पश्चिम बंगाल चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ममता दीदी के चुनाव जीतने का दावा किया था। मगर चुनाव नतीजे विपरीत निकले, भाजपा ने वहां 207 सीटें जीतीं और पहली बार सरकार बना रही है। दीदी ने मतगणना में खेला होने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने बंगाल में भाजपा द्वारा मतगणना की जगह मनगणना करने की बात कही और साथ में ही प्रदेश में हुए उपचुनाव में भी इसी तरह गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।

ब्राह्मणों को साधने की कोशिश

प्रदेश में भाजपा को 21% ब्राह्मण व ठाकुर वोटरों ने अपनाया, लेकिन सरकार बनने के बाद योगी राज में माफिया तंत्र को जड़ से खत्म कर दिया। इसमें कई ब्राह्मण माफिया भी शामिल थे। अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कई बार खुले मंचों से आरोप लगाया कि ब्राह्मणों पर जुल्म किया जा रहा है, वहीं क्षत्रियों पर सरकार नरमी से पेश आ रही है।

 

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कई क्षत्रिय माफियाओं के खिलाफ बड़ी संख्या में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद कार्रवाई नहीं की गई। अखिलेश यादव ब्राह्मणों को लुभाने के प्रयास में लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक 2027 में होने वाले चुनाव में अधिक से अधिक ब्राह्मणों को टिकट देने की भी तैयारी की जा रही है।

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