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'राहुल गांधी की वजह से गिरा लोकसभा में बहस का स्तर', रिजिजू का तंज

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संसद में आने के बाद से लोकसभा में बहस का स्तर गिर गया है।

kiren says Standard of LS debates dropped since Rahul entry in Parliament

किरेनी रिजीजू, Image Credit: PTI

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20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जमकर चुनाव प्रचार कर रही है। इस दौरान संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के संसद में आने के बाद से लोकसभा में बहस का स्तर गिर गया है। रिजिजू ने कहा कि भाजपा और महायुति के पक्ष में एक खामोश लहर है और लड़की बहन योजना से सत्तारूढ़ गठबंधन को फायदा होगा। 

 

लोकसभा में बहस का स्तर गिर गया

रिजीजू ने आगे कहा, 'राहुल गांधी के आने के बाद से लोकसभा में बहस का स्तर गिर गया है। हमारे पास ऐसे लोग हैं जो बात कर सकते हैं और बहस कर सकते हैं, लेकिन कांग्रेस के पास ऐसा कोई नहीं है और जो लोग बहस करना चाहते हैं, वे राहुल गांधी से डरते हैं।' रिजिजू ने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ सांसदों ने उनसे कहा है कि वे बहस और चर्चा चाहते हैं, लेकिन विपक्ष के नेता को इसकी चिंता नहीं है क्योंकि वे बहस नहीं कर सकते और कुछ एनजीओ द्वारा दिए गए चिट पढ़ते हैं। 

 

कांग्रेस पर कसा तंज 

राहुल गांधी की आलोचना करते हुए रिजीजू ने कहा कि उन्हें दलितों, आदिवासियों, संविधान और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के बारे में बोलने का अधिकार नहीं है। वक्फ (संशोधन) विधेयक के विरोध के बारे में पूछे जाने पर रिजिजू ने कहा कि विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधेयक का विरोध करने वाले लोग राजनीतिक कारणों से ऐसा कर रहे हैं। 

 

वक्फ (संशोधन) विधेयक पर कई लोगों का समर्थन

रिजीजू ने दावा किया कि कई मुस्लिम प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की और अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के कई पिछड़े सदस्यों, महिलाओं और बुद्धिजीवियों ने कहा है कि वे विधेयक का समर्थन करते हैं। वक्फ बोर्डों को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन करने वाले विधेयक में 1995 के अधिनियम में दूरगामी बदलावों का प्रस्ताव है, जिसमें ऐसे निकायों में मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना शामिल है। 

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