3 चेहरे, 60 सीटें, मांग एक, गठबंधन के साथी UP में कैसे BJP पर बना रहे दबाव?
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रचार की शुरुआत नहीं की है लेकिन सहयोगी दलों के नेता अभी से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। किसका क्या हाल है, आइए जानते हैं।

ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद। Photo Credit: PTI
उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। भारतीय जनता पार्टी की राज्य में साल 2017 से ही सरकार है। बीजेपी, कम सीटें होने के बाद भी गठबंधन के साथियों को सत्ता में मजबूत हिस्सेदारी देती है। साल 2022 में बीजेपी के सहयोगी दलों में ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। पूर्वांचल में बीजेपी के 3 सहयोगी हैं, जो ज्यादा सीटों के लिए अभी से दबाव बना रहे हैं।
यूपी में एनडीए गठबंधन के 3 बड़े चेहरे, पूर्वी उत्तर प्रदेश से हैं। ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल की सियासत, पूर्वांचल भरोसे है। अपने-अपने सियासी गढ़ में तीनों मजबूत चेहरे हैं, जिनके नाम पर वोट पड़ते हैं। निषाद पार्टी, सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (एस) तीनों राजनीतिक दलों की सियासत, जातीय आधार पर ही टिकी है।
तीनों, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। कैसे तीनों नेता, बीजेपी पर ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रहे हैं, आइए समझते हैं-
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संजय निषाद क्या कर रहे हैं?
संजय निषाद, निर्बल इंडियन शोषित हमार आम दल के अध्यक्ष हैं। यह पार्टी, निषाद पार्टी के नाम से जानी जाती है। निषाद पार्टी की पकड़ पूर्वांचल में हैं। गठबंधन में अब वह ज्यादा सीटें चाहते हैं। संजय निषाद, निषाद युवाओं के लिए आरक्षण मांग रहे हैं। गंगा और यमुना से सटे उन इलाकों में वह जोर दे रहे हैं जहां निषाद वोटर मजबूत स्थिति में हैं। तभी वह कभी महाराजगंज जा रहे हैं, कभी गोरखपुर, कभी बलिया तो कभी मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में।
निषाद समाज की क्या ताकत है?
संजय निषाद, केवल उन क्षेत्रों में दौरा कर रहे हैं, जहां निषाद बहुसंख्यक हैं। निषाद या मल्लाह समुदाय, ज्यादातर नदियों के किनारे ही बसा है। संजय निषाद का दावाहै कि उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की आबादी 9 प्रतिशत है, हालांकि सरकारी आंकड़ों में यह सिर्फ 2 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा बताई जाती है। वह ज्यादा सीटों पर अपना हक मांग रहे हैं।
किन जिलों पर जोर दे रहे संजय निषाद?
उत्तर प्रदेश में निषाद, केवट और मल्लाह समाज के लोग, ज्यादातर नदियों के किनारे बसे हैं। नौकायन और मछली पालन इनका अहम पेशा है। पूर्वांचल और मध्य यूपी के जिले इस समुदाय के मुख्य गढ़ माने जाते हैं। गोरखपुर, संतकबीरनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर और भदोही में निषाद निर्णायक स्थिति में हैं। कानपुर, मिर्जापुर और सुल्तानपुर में भी निषाद मजबूत हैं। संजय निषाद, इस समुदाय के बड़े नेता हैं।
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संजय निषाद कितनी सीटें मांग रहे हैं?
यूपी विधानसभा की 403 विधानसभा सीटों में निषाद पार्टी के पास 6 सीटें हैं। साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने नोएडा की एक जनसभा में 40 सीटों की मांग की है।
ओम प्रकाश राजभर क्या कर रहे हैं?
ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी:-
भारतीय जनता पार्टी के हम चार सहयोगी दल हैं। संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल, जयंत चौधरी और एक हम हैं। हमारे बीच सीट बंटवारे का कोई झगड़ा नहीं है, झगड़ा सरकार बनाने का है। हम चारों लोग कंधा लगाएंगे और एक लोग पीछे। बिल्कुल लगाकर पहुंचा देंगे घाट तक।
किन जिलों पर जोर दे रहे हैं ओम प्रकाश राजभर?
ओम प्रकाश राजभर का रुख, फिलहाल संजय निषाद से अलग है। राजभर समुदाय, यूपी में मजबूत स्थिति में है। पूर्वांचल में यह ताकतवर समुदाय है। गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, देवरिया और अंबेडकरनगर में राजभर मजबूत स्थिति में हैं।
राज्य की लगभग 60 से 120 विधानसभा सीटों पर यह समुदाय प्रभावी है। करीब 25-30 सीटों पर इनकी आबादी जीत हार तय करने की स्थिति में है। पूर्वांचल के कई क्षेत्रों में इनका वोट बैंक 12 फीसदी से 20 फीसदी तक है। समाजवादी पार्टी हो या बीजेपी, हर दल, ओम प्रकाश राजभर के साथ गठबंधन करना चाहता है।
क्या कर रहे हैं ओम प्रकाश राजभर?
ओम प्रकाश राजभर 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से बिगुल फूंक दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की 6 सीटें आईं थीं। अब ओम प्रकाश राजभर का दावा कभी 62 सीटों का रहा है, अब वह आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर दावा ठोकना चाहते हैं। ओम प्रकाश राजभर ने खुद आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का संकेत दिया है और अपने बेटे के लिए भी दावेदारी पेश की है। उनकी रणनीति मुख्य रूप से पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को एकजुट करने पर है। वह अपनी'राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना' भी बना चुके हैं। सावधान यात्रा से बड़ा चुनावी सपना देख रहे हैं। वह बिहार विधानसभा चुनावों में भी एनडीए गठबंधन से अलग चुनाव लड़ चुके हैं। यूपी तो उनका गढ़ ही है।
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क्या कर रहीं हैं अनुप्रिया पटेल?
अनुप्रिया पटेल, अपना दल-एस की नेता हैं। साल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण, क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को उठाकर आए दिन चर्चा में रहती हैं। उनकी पकड़ मजबूत है। वह संगठन विस्तार के लिए स्थानीय स्तर पर पंचायत और निकाय चुनावों में भी अपनी पार्टी की भागीदारी बढ़ाना चाहती हैं। अनुप्रिया पटेल की कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने की है।
कुर्मी समुदाय की ताकत क्या है?
उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय ताकतवर स्थिति में है। मिर्जापुर, प्रयागराज, बरेली, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बस्ती, कानपुर और फतेहपुर जैसे जिलों में यह समुदाय, निर्णायक स्थिति में है। यह आबादी, जीत हार तय करती है। राज्य की लगभग 35 से 45 विधानसभा सीटों पर कुर्मी वोटर हैं। कुर्मी समुदाय के करीब 41 विधायक यूपी विधानसभा में हैं।
यूपी में कुर्मी समुदाय करीब 6 फीसदी है। यही ताकत, देखते हुए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री पकंज चौधरी को यूपी की कमान सौंपी है। अनुप्रिया पटेल के साथ होने से एनडीए और मजबूत स्थिति में है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी, दोनों इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में रहती हैं।
कितनी सीटों पर लड़ना चाहती हैं अनुप्रिया पटेल?
अनुप्रिया पटेल की दावेदारी मजबूत है। 17 सीटों पर चुनाव लड़कर उनकी पार्टी ने साल 2022 में 12 सीटें हासिल की थीं। अब वह दोगुनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। बीजेपी के लिए गठबंधन के ये साथी, लगातार दबाव बढ़ा रहे हैं।
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