बिहार में NDA को आंख दिखाई, UP में बने 'मार्शल', अखिलेश से नाराज क्यों OP राजभर?
सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी का कोर वोटबैंक राजभर हैं। यह समुदाय, उत्तर प्रदेश में कई सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में है।

ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव। Photo Credit: Social Media
किसी जमाने में अखिलेश यादव के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरने रहने वाले ओम प्रकाश राजभर, इन दिनों अखिलेश यादव के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर हैं। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है। अखिलेश यादव के साथ ओम प्रकाश राजभर का रिश्ता, पहले खट्टा, फिर मीठा, फिर खट्टा वाला रहा है। कभी वह अखिलेश यादव पर गरजते हैं, कभी अपने तेवर नरम कर लेते हैं। ओम प्रकाश राजभर की सियासत, उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसी है।
बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के खिलाफ प्रत्याशी उतारने वाले ओम प्रकाश राजभर, खुद को भारतीय जनता पार्टी का सच्चा हितैषी बता रहे हैं और जातीय समीकरण के नाम पर अखिलेश यादव को जमकर कोस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अखिलेश यादव के लिए यूपी जीतना असंभव है।
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बिहार में NDA को ही दिखाई आंख
ओम प्रकाश राजभर के राजनीतिक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA से अलग राह अपनाई थी। शुरुआत में SBSP ने 3 सीटें मांगी थी। तीन सीटें भी एनडीए गठबंधन ने नहीं दी तो अलग होकर 100 से ज्यादा सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक दी। 100 से ज्यादा सीटों पर अकेले चुनाव भी लड़ने का दावा किया। करीब 27 सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। बिहार में कुछ नहीं मिला तो अब ओम प्रकाश राजभर, यूपी में अपने कदम जमा रहे हैं।
अखिलेश यादव से किन बातों को लेकर नाराज हैं OP राजभर?
ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, SBSP:-
आपके शासनकाल में पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और गरीबों के खिलाफ जो नीतियां बनीं, उन्होंने सामाजिक न्याय को कमजोर किया और कुछ खास वर्गों तक ही सत्ता और संसाधनों को सीमित कर दिया। लेकिन याद रखिए, राजभर समाज अब जाग चुका है, अपने सम्मान और अधिकार के लिए खड़ा हो चुका है, और किसी भी राजनीतिक दबाव या लठैती के सामने झुकने वाला नहीं है।
ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव पर राजभर जाति को कमजोर करने के आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अखिलेश यादव, राजभर वोटों को बांटने के लिए चक्रव्यूह रच रहे हैं। ओम प्रकाश राजभर का मानना है कि राजभर समाज के लोगों को उनकी रैलियों में भीड़ बनाने के लिए पहले मजबूर किया जाता है, अब राजभर स्वतंत्र हैं और उनका अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व है। अखिलेश यादव पर ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया है कि वह राजभर समाज के आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को घेरा है। उन्होंने लिखा, 'अखिलेश यादव, आपकी बेचैनी अब छुपाए नहीं छुप रही है। सत्ता से दूर होने का दर्द और वापस लौटने की घटती संभावनाएं आपको अंदर से विचलित कर रही हैं। यही वजह है कि आप आज उस राजभर समाज से असहज हैं, जो कभी आपकी रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता था, लेकिन आज अपने हक और सम्मान के साथ सत्ता में बराबरी की भागीदारी कर रहा है।'
https://twitter.com/oprajbhar/status/2050762610833047782
उन्होंने कहा, 'ओमप्रकाश राजभर को रोकने के लिए आपने एक पूरा चक्रव्यूह रचा है, गरीबों की आवाज दबाने का, पिछड़ों और अति पिछड़ों को उनका हक न मिलने देने का, सबसे बड़ा, आरक्षण के वर्गीकरण को रोकने का। आप अच्छी तरह जानते हैं कि जिस दिन आरक्षण का सही वर्गीकरण हो गया, उस दिन असली हकदारों को उनका अधिकार मिल जाएगा, और आपकी राजनीति की जमीन खिसक जाएगी। आपके शासनकाल में पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और गरीबों के खिलाफ जो नीतियां बनीं, उन्होंने सामाजिक न्याय को कमजोर किया और कुछ खास वर्गों तक ही सत्ता और संसाधनों को सीमित कर दिया।'
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ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, SBSP:-
याद रखिए, राजभर समाज अब जाग चुका है, अपने सम्मान और अधिकार के लिए खड़ा हो चुका है और किसी भी राजनीतिक दबाव या लठैती के सामने झुकने वाला नहीं है। मार्शल समाज राजभर न झुका है, न झुकेगा।
ऐसा सिर्फ एक बयान नहीं है। पहले भी वह अखिलेश यादव को यादव बनाम राजभर के मुद्दे पर घेर चुके हैं।
राजभर को 'मार्शल' क्यों बता रहे हैं ओम प्रकाश राजभर?
राजभर समुदाय, अपना संबंध, 'भर' राजवंश से जोड़ता है। समुदाय के भीतर लोककथाएं हैं कि यह समुदाय, मध्य काल के दौरान अवध और पूर्वांचल के बड़े हिस्से पर राज्य करता था। राजा सुहेलदेव समाज के सबसे बड़े योद्धा थे। उन्होंने 11वीं शताब्दी में बहराइच के युद्ध में गाजी सालार मसूद को हराया था। गाजी मियां की कब्र पर हर साल मेला भी लगता है। यह समुदाय, खुद को राजा सुहेलदेव से जोड़कर देखता है।
यादव बनाम राजभर कर रहे OP राजभर?
ओम प्रकाश राजभर, अब यादव बनाम राजभर की राजनीति पर उतर आए हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से कहा, 'जब आपकी सरकार थी, तब भी गरीब यादव गरीब ही थे और आज भी बड़ी संख्या में वही हाल है। बहुजन और गैर-यादव पिछड़ा समाज को इतिहास पढ़ाने से पहले यह समझ लीजिए कि यादवों का इतिहास ही बहुजन समाज का इतिहास नहीं है। शायद आपको खुद अपने इतिहास के 10 असली क्रांतिकारियों के नाम गिनाने में भी कठिनाई हो जाए और कृपया ऐसे नाम न दीजिए जो अपराध की वजह से जाने गए हों।'
ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'बहुजन समाज का असली इतिहास उन महान विभूतियों का है जिन्होंने संघर्ष किया, बलिदान दिया और समाज को दिशा दी। महाराजा सुहेलदेव राजभर,अवंती बाई लोधी,भगवान बिरसा मुंडा, झलकारी बाई, ऊदा देवी, डॉ. भीमराव अंबेडकर,कांशीराम यही असली प्रेरणा हैं, यही बहुजन चेतना के स्तंभ हैं न कि सत्ता में बैठे कुछ परिवारों का राजनीतिक इतिहास।'
ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, SBSP:-
दो-दो हजार बीघा जमीन वाले जमींदार कब वंचित और बहुजन बन गए। यह सवाल आज हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है, जिसे पप्पू यादव जैसे नेता भी कई बार उठा चुके हैं। अब बहुजन समाज जाग चुका है। अब वह अपने अधिकारों के लिए खड़ा है। अब वह पहचान चुका है कि कौन उसके हक का सौदा करता रहा और कौन उसके साथ खड़ा है। यह सदी गैर-यादव पिछड़ा और बहुजन समाज के उत्थान की सदी है। अब हक मिलेगा, सम्मान मिलेगा और भागीदारी भी तय होगी।
अब अखिलेश यादव और ओपी राजभर का रिश्ता क्या है?
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) का औपचारिक गठबंधन अक्टूबर 2021 में हुआ था। साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए दोनों साथ आए थे। इससे पहले, वह बीजेपी गठबंधन का हिस्सा रहे हैं। इस गठबंधन के तहत दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा, जिसमें राजभर को समाजवादी पार्टी गठबंधन का अहम ओबीसी चेहरा माना गया।
चुनाव के तुरंत बाद जुलाई 2022 में राज्यसभा, उपचुनाव और राष्ट्रपति चुनाव जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़ गए। ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को 12 जुलाई तक का समय देते हुए गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। इसके बाद 2023-24 में राजभर फिर से बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो गए। अब वह तब से ही अखिलेश यादव को घेर रहे हैं।
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ओम प्रकाश राजभर के निशाने पर अखिलेश यादव ही क्यों हैं?
अखिलेश यादव, यूपी में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति करते हैं। उन्होंने साल 2024 से ही इसे 'PDA' का नाम दिया है। अब वह सिर्फ यादव और मुस्लिम पर फोकस न करके, सभी पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि अगर गैर यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का साथ मिला तो सूबे में उनकी सियासत चमक जाएगी।
ओम प्रकाश राजभर भी खुद को पिछड़ों का नेता बताते हैं। ओम प्रकाश राजभर अखिलेश की PDA कवायद को फर्जी बताते है। उनका कहना है कि अखिलेश यादव, गैर यादवों को न तो टिकट देते हैं, न ही उनका सही हक देते हैं। ओम प्रकाश राजभर कई मंचों से कह चुके हैं कि 'वोट हमारा, राज तुम्हारा' वाला दांव, अब नहीं चलेगा।
ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, SBSP:-
हमारा इतिहास महाराजा सुहेलदेव राजभर, रानी अवंती बाई लोधी का इतिहास है। हम अपना राजनीतिक अधिकार लेते रहेंगे। गरीब-गुरबा की पीठ पर यादवों की लाठी के निशान हैं। अखिलेश की सत्ता के लिए हम दरी नहीं बिछाएंगे।
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी, SBSP अब गैर यादव पिछड़ी जातियों को लामबंद कर रही है। राजभर और लोध समुदाय को साधने में वह काफी हद तक कामयाब रहे हैं और इनके लिए अलग प्रतनिधित्व चाहते हैं। ओम प्रकाश राजभर, अगर समाजवादी पार्टी के साथ दिखते हैं तो उनका अपने वोट बैंक पर खतरा मंडराएगा, अब वह अखिलेश से पंगा लेते हैं तो उनका अपना कोर वोट बैंक एक होगा। अब वह यादव बनाम राजभर का राग भी अलाप रहे हैं। अखिलेश यादव, सीधे तौर पर ओपी राजभर को कुछ कहने से बच रहे हैं।
ओपी राजभर का डर क्या है?
ओम प्रकाश राजभर की गिनती, अपनी जाति के बड़े नेताओं में होती है। वह राजभर समुदाय के सबसे बड़े चेहरे है। राजभर समुदाय, पूर्वांचल में निर्णायक स्थिति में है। गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, देवरिया और अंबेडकरनगर में राजभर समाज हार जीत, तय करने की स्थिति में है। करीब 60 से 120 विधानसभा सीटों पर यह समुदाय प्रभावी है।
25-30 सीटें ऐसी हैं, जहां राजभर वोटर, जीत हार तय कर सकते हैं। पूर्वांचल के कई क्षेत्रों में इनका वोट बैंक 12 फीसदी से 20 फीसदी तक है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी हो या बीजेपी, ओम प्रकाश को कोई नजर अंदाज नहीं कर पाता है। ओम प्रकाश राजभर को इसी वोट के खिसकने का डर सता है, वह अभी से राजभर वोटों को लामबंद करने में जुट गए है।
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