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रामराज्य नहीं, महाराजा रणजीत सिंह का राज, पंजाब में बीजेपी ने क्यों बदली रणनीति?

पंजाब में बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। बीजेपी ने एक सिख चेहरे को अपना अध्यक्ष बनाया है जो महाराजा रणजीत सिंह का राज पंजाब में लाने की बात कह रहे हैं।

AI Image of Punjab BJP

बीजेपी ने बदली पंजाब में रणनीति, Photo Credit: AI

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति देश के अधिकांश हिस्सों में रामराज्य, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 1990 के दशक से लेकर 2020 के दशक तक जीरो से हीरो तक पार्टी ने हिंदुत्व के मुद्दे को अपनी धार बना लिया है। उत्तर प्रदेश से असम पश्चिम बंगाल तक हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी ने विस्तार किया है। उत्तर से पूर्वोत्तर तक पार्टी का लगभग एकछत्र राज हो गया है लेकिन अभी भी पार्टी उत्तर भारत के पंजाब राज्य में संघर्ष कर रही है। बंगाल के बाद पार्टी अब पंजाब में भी सत्ता पाना चाहती है और इसके लिए पार्टी ने अपनी रणनीति को अब पूरी तरह से बदल लिया है। 


पार्टी जहां अन्य राज्यों में रामराज्य लाने की बात करती है, वही पार्टी अब पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह का राज लाने की बात कर रही है। इस रणनीति को लागू करने की शुरुआत कल से पार्टी ने कर भी दी है। पार्टी ने अपनी हिंदुत्व के चौले से बाहर निकलकर एक सिख को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष बनया है। केवल सिंह ढिल्लों ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कहा, 'पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह जैसा राज BJP लाएगी, विकास और भाईचारे के साथ।' महाराजा रणजीत सिंह सिख राज, सिख विरासत, पंजाबी अस्मिता और क्षेत्रीय गौरव का प्रतीक हैं और बीजेपी अब उन्हें अपने राजनीतिक नैरेटिव का केंद्र बना रही है।

 

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पार्टी ने बदली रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने पंजाब के लिए अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। पार्टी समझ चुकी है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश या राजस्थान वाला हिंदुत्व मॉडल पंजाब में उसी तरह काम नहीं करेगा। इससे पहले कई दशकों तक पंजाब में बीजेपी सिर्फ हिंदुओं की पार्टी के रूप में स्थापित रही। पार्टी अब जब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है तो रणनीति में भी बदलाव किया जा रहा है।

आखिर क्यों बदली रणनीति?

पंजाब देश का एकमात्र सिख बहुल राज्य है। लंबे समय तक बीजेपी यहां शिरोमणि अकाली दल (SAD) के जूनियर सहयोगी की भूमिका में रही, लेकिन किसान आंदोलन के बाद अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन टूट गया। इसके बाद बीजेपी को पहली बार अकेले पंजाब में राजनीतिक जमीन तलाशनी पड़ रही है। इससे पहले बीजेपी हिंदु-सिख वोटों के गठबंधन से अकाली दल के जूनियर पार्टनर के रूप में सत्ता में रही है। हालांकि, पंजाब की बहुसंख्यक सिख आबादी बीजेपी के पक्ष में नहीं रही है। इसी वजह से पार्टी अब पंजाब में राम मंदिर राजनीति के बजाय सिख इतिहास, महाराजा रणजीत सिंह और पंजाब की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दे रही है। बीजेपी का लक्ष्य खुद को केवल हिंदू शहरी पार्टी की छवि से बाहर निकालकर ग्रामीण और सिख समाज तक पहुंचाना है।

महाराजा रणजीत सिंह इतने अहम क्यों?

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के इतिहास के सबसे प्रभावशाली शासकों में माने जाते हैं। उन्हें 'शेर-ए-पंजाब' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने 19वीं सदी की शुरुआत में बिखरी हुई सिख मिसलों को एकजुट कर शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की थी। महाराजा रणजीत सिंह को पंजाब के इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में देखा जाता है जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की और विभिन्न धर्मों को साथ लेकर शासन चलाया।

 

उनका शासन केवल सैन्य शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि धर्म, सुशासन और सामाजिक समरसता के लिए भी जाना जाता है। उनके दरबार में सिखों के साथ-साथ हिंदू और मुस्लिम अधिकारी भी महत्वपूर्ण पदों पर थे। महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब को राजनीतिक स्थिरता दी, विदेशी आक्रमणों से सुरक्षित रखा और लाहौर को अपनी राजधानी बनाकर एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की। यही कारण है कि आज भी पंजाब की अस्मिता, गौरव और एकता के प्रतीक के रूप में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

 

महाराजा रणजीत सिंह को पंजाब के इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में देखा जाता है जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की और विभिन्न धर्मों को साथ लेकर शासन चलाया। इतिहासकार उन्हें एक समावेशी और व्यावहारिक शासक मानते हैं, जिनके शासन में हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी को प्रशासन में प्रतिनिधित्व मिला था।

 

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बीजपी की रणनीति समझिए

बीजेपी की नई रणनीति का सबसे बड़ा संकेत हाल ही में देखने को मिला जब पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया। खास बात यह है कि पंजाब बीजेपी परंपरागत रूप से हिंदू नेताओं के नेतृत्व में चलती रही है, लेकिन इस बार पार्टी ने जाट सिख चेहरे को आगे कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी की 'सिख आउटरीच पॉलिटिक्स' का हिस्सा मान रहे हैं। पार्टी का लक्ष्य उन ग्रामीण इलाकों में प्रभाव बढ़ाना है जहां अब तक अकाली दल, कांग्रेस या आम आदमी पार्टी का दबदबा रहा है।

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