इसी महीने की 4 तारीख यानी 4 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। असम और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट बहुमत मिला और दोनों जगह उसके मुख्यमंत्रियों ने काम शुरू कर दिया है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद गठबंधन की सरकार बन गई है। वहीं, केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन को पूर्ण बहुमत होने के बावजूद 10 के बाद भी मुख्यमंत्री पद पर फैसला नहीं हो सका है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं और पार्टी का नेतृत्व अब तक फैसला ही नहीं कर सका है। अब कहा जा रहा है कि गुरुवार को केरल से ही राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का एलान हो सकता है।
बुधवार को दिल्ली में हुई पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक के बाद कुछ नेताओं को केरल भेजा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यही नेता पहले तो स्थानीय विधायकों और नेताओं से बात करेंगे और फिर राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का एलान किया जाएगा। अभी भी रमेश चेन्निथला, के सी वेणुगोपाल और वी डी सतीशन मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि अब मुख्य लड़ाई वी डी सतीशन और के सी वेणुगोपाल के बीच है और इस रेस में केसी वेणुगोपाल आगे चल रहे हैं। उधर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कुछ बयानों ने इस गठबंधन को भी चिंता में डाल दिया है।
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गुरुवार को केरल में कांग्रेस के विधायक दल की बैठक हो सकती है और इसी बैठक में विधायक दल का नेता या यूं कहें तो मुख्यमंत्री का चुनाव हो सकता है। चर्चा यह है कि दोनों तरफ के समर्थकों का जोश देखते हुए गुरुवार के दिन हाई वोल्टेज ड्रामा होने की भी उम्मीद है। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा है कि पार्टी ने पूरी चर्चा कर ली है और गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम का एलान हो जाएगा। बता दें कि अधिकतम 23 मई तक राज्य में नई सरकार बनानी होगी।
CM के नाम के एलान से टूटेगा गठबंधन?
केरल में कांग्रेस की ओर से हो रही देरी पर उसकी प्रमुख सहयोगी IUML ने नाराजगी जाहिर की है। बुधवार को IUML के नेताओं ने कहा है कि वे कांग्रेस के फैसले का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर फैसला आ जाएगा। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि IUML किसी भी हालत में वी डी सतीशन को ही मुख्यमंत्री देखना चाहती है। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि यह IUML का ही प्रस्ताव है कि अगर सतीशन को मुख्यमंत्री पद न मिले तो वह कोई और पद स्वीकार न करें।
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यही वजह है कि कांग्रेस की चिंता और बढ़ गई है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के सी वेणगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में है क्योंकि कांग्रेस के ज्यादातर विधायक उनके पक्ष में हैं। हालांकि, कांग्रेस के कुछ विधायकों और अन्य गठबंधन सहयोगी दलों के विधायकों की संख्या के आधार पर वी डी सतीशन का दावा भी मजबूत है। यही वजह है कि कांग्रेस का नेतृत्व असमंजस की स्थिति में है और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।
क्या है गठबंधन का समीकरण?
केरल की अगुवाई में बने यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) को 100 से ज्यादा सीटों पर जीत मिली है। 140 विधानसभा वाले केरल में सरकार बनाने के लिए कुल 71 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के 63 विधायक जीते हैं और उसकी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी IUML के 22 विधायक जीते हैं। सिर्फ इन दोनों पार्टियों को मिलाकर ही 85 विधायक हो जाते हैं। हालांकि, IUML ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि वह वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। IUML ने साफ कहा है कि कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के नाम का एलान होने के बाद ही वह अपनी राय साफ करेगी।
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इस स्थिति में अगर IUML अपना समर्थन वापस भी ले लेती है तब भी कांग्रेस की सरकार को कम से कम सरकार बनाने में दिक्कत नहीं आएगी। इसकी वजह है कि उसे सिर्फ 8 और विधायकों की जरूरत होगी। UDF में ही शामिल केरल कांग्रेस के 7 विधायकों को जीत मिली है। इसके अलावा, रिवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी के 3, रिवॉल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी के 1, केरल कांग्रेस (जैकब) के एक और कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी एक विधायक के अलावा कांग्रेस को चार निर्दलीयों का भी समर्थन हासिल है। इस तरह IUML के बगैर भी कांग्रेस के समर्थन में कुल 80 विधायक हैं जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हैं।